प्रताप नगर। पंचकूला के आसरेवाला क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद छछरौली के कलेसर जंगल सहित अन्य क्षेत्रों में शुरू की गई जांच अब पूरी हो चुकी है। करीब 15 दिनों तक चली इस जांच के बाद एसआईटी टीम ने अवैध रूप से कटे पेड़ों की गणना कर अपनी रिपोर्ट चेयरमैन को सौंप दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रिपोर्ट में कितने पेड़ों की अवैध कटाई, जलने या जलाए जाने की पुष्टि होती है।
जांच पूरी होने के बाद छछरौली कलेसर वन विभाग व वन्य प्राणी विभाग में हलचल बढ़ी हुई है। हालांकि, यह जांच शुरू से ही विवादों में रही है। विभाग के उच्च अधिकारियों तक जांच में गड़बड़ी और कागजी खानापूर्ति की शिकायतें भी पहुंची हैं। जांच के शुरुआती दिनों में टीम सक्रिय रही, लेकिन बाद में जांच केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई। सरकार के निर्देश पर गठित इस टीम में आधा दर्जन डीएफओ और सैकड़ों वन कर्मचारी शामिल थे, जिन्हें जंगलों में कटे खैर व अन्य कीमती पेड़ों का आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच में डीएफओ रविंद्र धनखड़, सुरेंद्र डांगी, संदीप गोयत, राजेश माथुर और ऋषिराज समेत कई अधिकारी शामिल रहे। इस बारे में वन रेंज अधिकारी कलेसर राजीव कांबोज ने बताया कि लगभग 15 दिनों तक चली जांच पूरी हो चुकी है।
एसआईटी टीम ने रिपोर्ट चेयरमैन को सौंप दी है। इस बारे में एसआईटी के चेयरमैन सुभाष यादव ही बता सकते हैं। इस संबंध में एसआईटी टीम के एक डीएफओ से संपर्क करने पर उन्होंने जानकारी देने से इन्कार करते हुए एसआईटी चेयरमैन सुभाष यादव से बात करने की बात कही। वहीं, सुभाष यादव से संपर्क के कई प्रयास किए गए, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।