संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। गलौड़ी गांव के राजकीय विद्यालय में बतौर शिक्षक कार्यरत रणधीर सिंह ने अपने इकलौते बेटे दुष्यंत की शादी में शगुन स्वरूप केवल एक रुपया व दो नारियल लेकर समाज को नई दिशा दिखाने का प्रयास किया है। बगैर दहेज के हुई इस शादी की क्षेत्र में काफी चर्चा है।
महमदपुर गांव के रहने वाले रणधीर सिंह ने तीन साल पहले अपनी छोटी बेटी सिंपल की शादी भी बिना दहेज के ही की थी। झंडा के शिव मंदिर कमेटी के पूर्व में प्रधान रहे मास्टर रणधीर सिंह सदैव ही धार्मिक व सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई साल पहले उनकी एक ऐसे बुजुर्ग दंपति की मुलाकात हुई जो दहेज के अभाव में अपनी बेटी की शादी करने में असमर्थ थे।
तब ही उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अपने बेटे की शादी में दहेज बिलकुल भी नहीं लेंगे। बीएससी नर्सिंग पास उनके बेटे दुष्यंत का रिश्ता खदरी गांव के नेत्रपाल की पुत्री साक्षी से हुआ तो उन्होंने अपने समधी को अपने प्रण के बारे में स्पष्ट कर दिया था। खदरी में संपन्न हुए विवाह समारोह में उन्होंने दहेज की बजाए केवल रुपया और दो नारियल शगुन स्वरूप लेकर अपने प्रण को निभाया।
यही नहीं नवदंपत्ती के स्वागत में रसूलपुर में आयोजित समारोह में भी उन्होंने किसी से भी शगुन नहीं लिया। नवदंपत्ती को आशीर्वाद देने पहुंचे जिला परिषद के चेयरमैन रमेश चंद्र ठसका, पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी व पूर्व विधायक अर्जुन सिंह सहित सभी अतिथियों ने मास्टर रणधीर सिंह के परिवार की सराहना की। सभी ने इस समाज से इस परंपरा अनुकरण करने का आह्वान किया।