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आरटीए के लिए इंस्पेक्टर ट्रांसपोर्टरों से वसूलते थे मंथली, विजिलेंस के रडार पर हैं कई कर्मचारी

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Inspectors used to charge transporters for RTA monthly, many employees are on the radar of Vigilance - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। ओवरलोड वाहनों से की गई वसूली के मामले में केवल आरटीए डॉ. सुभाष चंद्र ही नहीं बल्कि उनका स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहा है। यमुनानगर में आरटीए कार्यालय के टीआई व करनाल में निरीक्षक एमवीओ करनाल ट्रांसपोर्टरों के मालिकों से मंथली एकत्रित करते थे। इसके बाद मंथली आरटीए को जाती थी। इसका खुलासा खुद आरटीए सुभाष चंद्र ने विजिलेंस के समक्ष पूछताछ में किया है।
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ऐसे में यह दोनों अधिकारी भी विजिलेंस के निशाने पर आ गए हैं। सोमवार को सप्ताह का पहला दिन होने के बावजूद जगाधरी में आरटीए कार्यालय पर ताला लगा रहा। कामकाज के दिन कार्यालय पर ताला देख कर लोग भी हैरान रह गए। सूत्रों ने बताया कि आरटीए कार्यालय का सारा स्टाफ सोमवार को विजिलेंस करनाल के कार्यालय में पुलिस के सवालों का सामना करता रहा। देर शाम तक कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के स्टाफ से विजिलेंस ने पूछताछ की। आरटीए कार्यालय का कार्य बार बार प्रभावित न हो इसलिए सारे स्टाफ को एक साथ ही पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
दिल्ली, चंडीगढ़ व कैथल में छिपाई काली कमाई
सुभाष चंद्र को कोर्ट में पेश कर विजिलेंस ने चार दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान उनसे पूछा गया कि अब तक कितनी गाड़ियों को निकालने की एवज में उन्होंने ट्रांसपोर्टरों से रुपये लिए हैं, परंतु इसका कोई जवाब उन्होंने नहीं दिया है। माना जा रहा है कि ट्रांसपोर्टरों से लिया गया पैसा उसने चंडीगढ़, दिल्ली के बुराड़ी व कैथल के कौकत गांव में किसी स्थान पर छिपाया है। 30 लाख के अलावा आरटीए से अभी तक कितने रुपये रिकवर किए गए हैं इस पर भी विजिलेंस कुछ कहने से बच रही है। यह 30 लाख रुपये सुभाष चंद्र ने जगाधरी में अपने सरकारी आवास पर छिपा कर रखे हुए थे। जबकि 36 लाख 15 हजार रुपये उसके चार दलालों से बरामद किए जा चुके हैं।
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आरटीए कार्यालय में ताला लगने से बढ़ी लोगों की परेशानी
आरटीए कार्यालय पर ताला लगा होने के कारण लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। सोमवार को लोग दिनभर कार्यालय में अपने कार्यों को लेकर चक्कर काटते रहे। पुराना हमीदा के आसिम खान, गांव नागलपत्ती के बिलाल व जाकिर, गांव बैंडी के प्रदीप कुमार ने बताया कि आज उनके हैवी लाइसेंस की वेरिफिकेशन होनी थी। इसके लिए उन्होंने सारी फीस भी जमा करवा रखी है। 18 अक्तूबर से उनकी ट्रेनिंग शुरू होनी है परंतु आरटीए कार्यालय पर ताला लगा हुआ है। लाइसेंस की वेरिफिकेशन नहीं होने से वह कल से अपनी ट्रेनिंग भी नहीं कर पाएंगे। इसी तरह गांव कड़कौली के रविंद्र सिंह ने बताया कि वह 18 टायरी ट्रक चलाता है। उसे अपनी गाड़ी का टैक्स जमा कराना था परंतु कार्यालय पर ताला लगा हुआ है। वहीं गांव फतेहगढ़ के गुरमीत सिंह ने बताया कि उन्हें टूरिस्ट टैंपों का नंबर लेना था। यहां सुबह से खड़े हैं, लेकिन कार्यालय पर कोई नहीं आया। वह सड़क पर बिना नंबर के गाड़ी भी नहीं चला सकते।
ऐसे खुला ओवरलोड़ से काली कमाई का राज
करनाल विजिलेंस को यूपी के शामली निवासी ट्रांसपोर्टर अख्तर ने डीटीओ डॉ. सुभाष चंद्र के नाम से ओवरलोड वाहन निकालने के लिए मंथली लेने की शिकायत दी थी। जिसके बाद टीम ने दलालों को पकड़ने के लिए विजिलेंस ने जाल बिछाया। नौ अक्टूबर को शिकायतकर्ता से 40 हजार रुपये लेते पंसारी बाजार निवासी अंकित व उसके साथी लवली को पकड़ा गया। इसके बाद बाइपास रोड से गांधी धाम कालोनी निवासी नीरज को पकड़ा गया। आरोपियों के घर से करीब पांच लाख रुपये भी विजिलेंस ने बरामद किए थे। इनमें से लवली को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था जबकि अंकित व नीरज को तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। वीरवार को दोनों का रिमांड पूरा होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। आरोपी अंकित व नीरज से पूछताछ के बाद विजिलेंस ने संदीप को गिरफ्तार किया गया था। उसके घर से दस लाख रुपये बरामद हुए थे। इन दलालों से कुल 36 लाख 15 हजार रुपये बरामद किए गए थे। पूछताछ में सामने आया था कि ये डीटीओ के नाम से ओवरलोड वाहनों को निकलवाने के लिए रुपये लेते थे। हर गाड़ी का रेट तय करते थे। हरियाणा नंबर की गाड़ी के दस हजार रुपये व दूसरे राज्य की गाड़ी का 15 हजार रुपये प्रतिमाह फिक्स किया गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ओवरलोड वाहनों को निकलवाने के लिए कितनी मोटी वसूली की जा रही थी।
वर्जन
विजिलेंस करनाल के इंस्पेक्टर सचिन ने बताया कि आरटीए सुभाष चंद्र से रिमांड के दौरान पूछताछ की जा रही है। उसने उगाही के रुपये कहां-कहां छिपाए हैं इसका पता कर रहे हैं। आरोपी से रिकवरी की संभावना है। इस प्रकरण में जो भी इसमें संलिप्त होगा उनसे पूछताछ की जाएगी।

Inspectors used to charge transporters for RTA monthly, many employees are on the radar of Vigilance- फोटो : Yamuna Nagar

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