संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला जेल जगाधरी में बंद कैदियों को साक्षर बनाने के लिए पहल की जा रही है। शिक्षा विभाग के उल्लास प्रोजेक्ट के तहत जेल में अनपढ़ कैदियों को पढ़ना-लिखना सिखाया जाएगा, जिससे वे अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी कर सकें और समाज में पुनर्वास के लिए तैयार हो सकें।
जेल प्रशासन ने इस योजना को लागू करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। योजना के तहत ऐसे बंदियों और कैदियों की पहचान की गई है, जो पढ़-लिख नहीं सकते हैं हैं। वर्तमान में जिला जेल में करीब 1100 बंदी बंद हैं, यह संख्या रोजाना घटती बढ़ती रहती है। इनमें से 145 पूरी तरह से अनपढ़ हैं।
इस पहल का उद्देश्य बंदियों को बुनियादी साक्षरता प्रदान करना है, ताकि वे अपना नाम लिख सकें, साधारण शब्द पढ़ सकें और रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भर बन सकें। शिक्षा के माध्यम से बंदियों के व्यवहार और सोच में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
जेल प्रशासन का मानना है कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम भी है। इस योजना के तहत क, ख, ग से शुरुआत कर कैदियों को धीरे-धीरे शब्द, वाक्य और संख्यात्मक ज्ञान सिखाया जाएगा।
उल्लास- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के नाम से भी जाना जाता है, केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन व्यस्कों को साक्षर बनाना है। इस योजना के अंतर्गत पढ़ने, लिखने और गणना से जुड़े बुनियादी कौशल के साथ-साथ जीवनोपयोगी ज्ञान भी दिया जाता है।
कैदियों के जीवन में आएगा बदलाव : एसपी जेल
जिला जेल जगाधरी के एसपी सतेंद्र सिंह ने बताया कि जेल में बंद कई कैदी ऐसे हैं, जो शिक्षा से वंचित रहे हैं। उन्हें साक्षर बनाना जरूरी है, ताकि वे भविष्य में बेहतर जीवन जी सकें। शिक्षा विभाग के सहयोग से जल्द ही कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी और प्रशिक्षित शिक्षकों की मदद से कैदियों को पढ़ाया जाएगा। यह पहल कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और उन्हें समाज में नई पहचान बनाने में मदद करेगी।