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Yamuna Nagar News: भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान के बारे में दी जानकारी

Wed, 25 Feb 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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श्री श्याम गोशाला श्रीमद्भागवत कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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साढौरा। श्री श्याम गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी प्रिया किशोरी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु का दिया यह जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए है।
साध्वी ने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी का जन्म किसी न किसी लक्ष्य के साथ होता है और उसी उद्देश्य को समझना जीवन का सच्चा मकसद है। मनुष्य स्वयं निर्णय लेता है, लेकिन ईश्वर की व्यवस्था सर्वोपरि होती है।
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जीवन में यदि कोई विपरीत परिस्थिति आए तो व्याकुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि हर घटना के पीछे ईश्वर की योजना और कोई न कोई उद्देश्य छिपा होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति में मन लगाने का आह्वान किया।
कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत में वर्णित जड़ भरत प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा भरत ने राजपाट त्यागकर तपस्या की, लेकिन हिरण के मोह में पड़ने से उन्हें अगले जन्म में हिरण योनि मिली।
तत्पश्चात वे जड़ भरत के रूप में जन्मे। अत्यंत ज्ञानी होने के बावजूद उन्होंने संसार से निर्लिप्त रहने के लिए जड़वत आचरण किया और अंततः राजा रहूगण को आत्मज्ञान का उपदेश दिया।
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साध्वी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा वैराग्य परिस्थितियों से जन्म ले सकता है, लेकिन उसका दृढ़ होना आवश्यक है। पांच वर्ष की आयु में अपमानित होने पर ध्रुव ने कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि सच्चा वैराग्य मन से कामनाओं का त्याग है और यही परमात्मा प्राप्ति का मार्ग है। सच्ची भक्ति से भगवान मिलते है।
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