दीपेंद्र कुमार
यमुनानगर। प्लाईवुड व मेटल उद्योग से देशभर में पहचान पाने वाले यमुनानगर जिले की पहचान अब धीरे-धीरे बदल रही है। तीन राज्यों की सीमा से सटा यह जिला यमुनानगर अब अपराध का हॉट स्पॉट बनता जा रहा है। जिले में पिछले कुछ समय से लूट, डकैती, गैंगवार से लेकर रंगदारी की वारदातों में वृद्धि हुई है।
इससे एक ओर जिलेवासी दहशत में हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस के लिए भी अपराधियों पर लगाम कसना चुनौती बन रहा है। पिछले तीन-चार माह से जिला आपराधिक वारदातों के लिए सुर्खियों में है। लॉरेंस विश्नोई व काला राणा गैंग ने वारदात को अंजाम देने के लिए जिले को सॉफ्ट टारगेट बना लिया है। बीती 26 दिसंबर को ही जिले में गैंगवार की वारदात हुई थी। इस गैंगवार में शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए 80 राउंड से अधिक फायरिंग कर दहशत फैला दी थी। अब तक की जिले की यह सबसे बड़ी वारदात थी। इसकी गूंज पूरे हरियाणा में सुनाई दी थी।
जिले कारोबारी भी अपराधियों के निशाने पर हैं। जेलों और विदेशों में बैठे अपराधी अपना नेटवर्क चला रहे हैं। पिछले एक माह में यमुनानगर जिले में विदेशी नंबर से कॉल कर चार कारोबारियों से करोड़ों रुपये की रंगदारी की मांग कर चुके हैं। शनिवार को करनाल एसटीएफ ने भी मुठभेड़ के बाद जो बदमाश काबू किए थे, वे भी यमुनानगर में ही एक कारोबारी पर फायरिंग करने के लिए आए थे।
यमुनानगर जिला तीन राज्यों की सीमा से लगा है। जिले की सीमाए हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड़ से जुड़ी हैं। इसके साथ ही जिले की सीमा अंबाला, कुरुक्षेत्र से लगती है। अंबाला को पार करते ही पंजाब की सीमा आ जाती है। इससे अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद आराम से दूसरे राज्यों में फरार हो जाते हैं और पुलिस की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। संवाद
डकैती के आरोपी पुलिस से दूर
यमुनानगर में नवंबर माह में छह बदमाशों ने ज्वेलरी शोरूम में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। विरोध करने पर सर्राफ को गोली मार दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश यमुना नदी को पार कर यूपी होते हुए फरार हो गए थे। इसके बाद से ही आज तक पुलिस बदमाशों को काबू नहीं कर पाई है।