संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गर्मियोंं व बरसात के सीजन वायरल बुखार, चिकनगुनिया, मलेरिया व डेंगू का खतरा भी बढ़ने लग जाता है। स्वास्थ्य विभाग रैपिड फीवर सर्वे कर बुखार के संदिग्ध मरीजों की पहचान कर रहा है। यह सर्वे प्रत्येक माह एक से लेकर 10 तारीख तक होता है। अगस्त माह का रेपिड फीवर सर्वे पूरा हो चुका है।
हेल्थ वर्कर्स की टीमों ने जिले में 108596 घरों में जाकर जांच की। सर्वे के दौरान जांच में 2749 मरीज बुखार के मिले हैं। इन बुखार के मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवाए गए हैं। यदि इन मरीजों में से कोई डेंगू या मलेरिया से ग्रसित मिलता है तो उसका इलाज शुरू किया जाएगा। साथ ही उसे एरिया में फागिंग सहित अन्य गतिविधि कराई जाएगी।
जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. सुशीला सैनी ने बताया कि रैपिड फीवर सर्वे हर माह पहली से 10 तारीख तक चलता है। इसमें टीमें घर-घर जाकर जांच कर रही है। यह टीमें हर घर में बुखार, जुकाम व खांसी के मरीजों के बारे में जानकारी ले रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से रैपिड फीवर सर्वे के लिए आशा व एएनएम वर्करों को लगाया गया है।
जिले में लगभग 900 आशा वर्कर हैं। यह वर्कर गांवों में बुखार के मरीजों की पहचान रैपिड फीवर सर्वे के तहत करती हैं। जिन मरीजों को लंबे समय से बुखार रहता है। उनके सैंपल भी लिए जाते हैं। इसके साथ ही लोगों के घरों में जमा पानी में लार्वा की जांच की जाती है।
डाॅ. सैनी ने अनुसार मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, शरीर पर पड़ने वाले लाल निशान, तेज बुखार होना, तेज सिर दर्द, आंखों में दर्द होना, उल्टी आना और चक्कर महसूस होना। यदि इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं तो तुरंत सलाह के लिए डाॅक्टर के पास जाना चाहिए। इन लक्षणों को हलके में लेना भारी पड़ सकता है। बुखार के मरीजों के सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भिजवाए गए हैं।
यदि इनमें से किसी मरीज में डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया के लक्षण मिलते हैं तो उनका इलाज शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके स्वजनों के भी सैंपल लिए जाएंगे। उन्होंने लोगों से खानपान व स्वच्छता को लेकर सजग रहने की अपील की है। बरसात के मौसम में बहुत ज्यादा सजगता बरतने की जरूरत होती है। डाॅ. सैनी का कहना है कि बरसात के मौसम में मच्छरों से बहुत ज्यादा बचाव की जरूरत होती है। उनका कहना है कि सजगता बरत कर हम काफी हद तक सेहतमंद रह सकते हैं।