संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में श्रद्धालुओं को मानव जीवन में सद्गुणों के महत्व और ब्रह्मज्ञान की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया गया।
गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सरस्वती भारती ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में मानवीय गुण नहीं हैं तो वह वास्तविक अर्थों में मानव नहीं कहलाता। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को भावनात्मक रूप से संवेदनशील बनाया है ताकि वह संपूर्ण सृष्टि के प्रति दया और करुणा का भाव रख सके। लेकिन विडंबना है कि आज का मानव स्वार्थ पूर्ति के लिए दूसरों का अहित करने में भी संकोच नहीं करता।
उन्होंने बताया कि मानव का सर्वांगीण विकास केवल ब्रह्मज्ञान से ही संभव है, क्योंकि ब्रह्मज्ञान मृतप्राय मानवता के लिए संजीवनी का कार्य करता है और व्यक्ति को श्रेष्ठ मानव बनने की दिशा में अग्रसर करता है।साध्वी सरस्वती ने कहा कि ब्रह्मज्ञान और ध्यान साधना से मन के विकारों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सद्गुणों का संचार होता है।
जब तक मनुष्य अपनी पहचान केवल शरीर से करता है, तब तक उसके भीतर स्वार्थ, अहंकार और ईर्ष्या जैसे दुर्गुण उत्पन्न होते हैं। लेकिन आत्म साक्षात्कार के माध्यम से जब वह स्वयं को परमात्मा का अंश मानता है, तब उसे हर जीव और जड़-चेतन में परम सत्ता का अनुभव होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे प्रकाश के अभाव में अंधकार आता है, उसी प्रकार जीवन में सद्गुणों के अभाव में दुर्गुण पनपते हैं।
प्रवचन करतीं साध्वी सरस्वती भारती व अन्य। प्रवक्ता