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सरकारी अस्पतालों में कमीशन का खेल!

Fri, 23 May 2014 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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यमुनानगर। घाड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी झेल रहे मरीजों का मर्ज सरकारी अस्पताल के डॉक्टर और अधिक बढ़ा रहे हैं। टेस्ट के नाम पर मरीजों को प्राइवेट  लेबोरेटरी में भेजा जा रहा है।
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डॉक्टर यह खेल खुलेआम खेल रहे हैं। पर्ची पर यह भी लिखा जा रहा है कि टेस्ट किस लेबोरिटी से कराना है। यह स्थिति तब है, जब अस्पताल में सभी प्रकार के टेस्ट कराने की मशीन उपलब्ध है। कमीशन के लालच में इस मशीन का चार महीने से कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

बिलासपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हीमोग्लोबिन, शुगर, मलेरिया, टीबी और ब्लड शुगर के टेस्ट की सुविधा है। दिल, किडनी और अन्य बीमारियों के टेस्ट के लिए मरीजों को प्राइवेट लेबोरिटी भेजा जा रहा है। प्रतिदिन 25-30 मरीजों से ये टेस्ट प्राइवेट लेबोरिटी से कराए जा रहे हैं।
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‘अमर उजाला’ ने इसकी पड़ताल की तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर के हाथ से लिखी अस्पताल की एक पर्ची मिली, जिसमें बाहर से करवाए जाने वाले टेस्टों के नाम लिखे है। यही नहीं इस पर्ची पर यह भी लिखा है कि टेस्ट किस लेबोरिटी से कराने है। पर्ची पर प्राइवेट लाल लेबोरिटी का नाम लिखा है। इस पर्ची का नंबर 9288 है और यह 5 मई को जारी हुई है। जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल की पर्ची पर भेजे जाने वाले मरीजों से प्राइवेट लेबोरेटरी संचालक दोगुनी कीमत वसूल कर रहे हैं।

बायो केमिस्ट्री एनालाइजर का इस्तेमाल क्यों नहीं
सरकारी अस्पतालों में हर प्रकार के टेस्ट की सुविधा के लिए जिले के अधिकतर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बायो केमिस्ट्री एनालाइजर भेजे हैं। बिलासपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी करीब चार महीने पहले बायो केमिस्ट्री एनालाइजर भेजा गया था। लेकिन अब तक इसे चालू नहीं किया है। इसका इस्तेमाल किया जाए तो दिल, किडनी, लीवर और पीलिया सहित अन्य बीमारियों से संबंधित टेस्ट अस्पताल में मुफ्त हो सकेंगे। सूत्र बताते है कि जान बूझकर बायो केमिस्ट्री एनालाइजर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। क्योंकि इसके चालू होने से अस्पताल में सभी टेस्ट होने लगेंगे और प्राइवेट लेबोरिटी से मिलने वाली मोटी कमीशन बंद हो जाएगी।


महंगे टेस्ट लिखने से गरीब इलाज से महरूम
बिलासपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन हैबतपुर, मुगलवाली और बिलासपुर पीएचसी आती हैं। घाड़ क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांव के लोग मुगलवाली पीएचसी में इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधा ना होन से उन्हें बिलासपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलासपुर के अधीन बिलासपुर के 50 से अधिक गांव आते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलासपुर में प्रतिदिन 100-150 मरीज कई किलोमीटर का सफर तय कर इलाज के लिए आते हैं। घाड़ इलाके में गरीब तबका बहुतायत में हैं। उनके लिए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना सपने की तरह है। वे पूरी सरकारी अस्पताल पर निर्भर है। मुफ्त इलाज के लिए यहां आने वाले मरीजों को प्राइवेट लेबोरटी से टेस्ट लिखे जाने पर अधिकतर पैसों के अभाव में टेस्ट नहीं करवा पाते और बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।

पर्ची पर नहीं लिख सकते निजी डॉक्टर या लैब का नाम
नियमानुसार सरकारी अस्पताल के डॉक्टर किसी भी मरीज को टेेस्ट के लिए प्राइवेट डॉक्टर या लेबोरेटरी नहीं भेज सकते। यदि अस्पताल में उक्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है तो मरीज को उस सरकारी अस्पताल में रेफर किया जाना चाहिए जहां ये सुविधाएं उपलब्ध हैं। किसी भी सूरत में सरकारी डॉक्टर पर्ची पर प्राइवेट डॉक्टर या लैब का नाम नहीं लिख सकते।

बिलासपुर के एसएमओ डा. रमेश से सीधी बात-
सवाल-डॉक्टर साहब, बिलासपुर सरकारी अस्पताल में मरीजों को प्राइवेट लैब से टेस्ट कराने के लिए क्यों भेजा जा रहा है।
जवाब-जो टेस्ट अस्पताल में नहीं होते, मरीजों को उन्हें बाहर से कराने के लिए कहा जाता है।
सवाल- लेकिन अस्पताल की पर्ची पर प्राइवेट लैब का नाम लिखकर मरीजों को भेजा जा रहा है।
सवाल-अस्पताल की पर्ची पर किसी भी लैब का नाम नहीं लिखा जाता।
सवाल-हमारे पास पर्ची है, जिस पर प्राइवेट लाल लैब का नाम लिखा है।
जवाब-लाल लैब नेशनल स्टैंडर्ड की लैब है। इसके पास मरीजों को उसी टेस्ट के लिए भेजा जाता है जो अस्पताल में नहीं होते। जैसे लिपिड प्रोफाइल टेस्ट की सुविधा हमारे अस्पताल में नहीं है। लाल लैब में मरीज को भेजा जाना गलत नहीं है।
सवाल-लिपिड प्रोफाइल टेस्ट ट्रामा सेंटर में भी होता है। इस टेस्ट के लिए मरीज को ट्रामा सेंटर भेजा जा सकता है। ट्रामा सेंटर में लगभग सभी टेस्ट होते हैं।
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जवाब-हां, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट ट्रामा सेंटर में होता है। लेकिन अगर मरीज वहां ना जाना चाहे तो हम क्या कर सकते हैं।
सवाल-बिलासपुर अस्पताल में चार महीने पहले बायो केमिस्ट्री एनालाइजर आने के बावजूद अब तक उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया।
जवाब-अस्पताल में जगह की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। अगले सप्ताह तक बायो केमिस्ट्री एनालाइजर को शुरू कर दिया जाएगा।
सवाल-जब पहले जगह की कमी थी तो अब एक सप्ताह में जगह का इंतजाम कैसे हो जाएगा।
जवाब-सिविल सर्जन ने अस्पताल का दौरा किया था। उन्होंने एएनएम के रूम में इसे चालू करने को कहा है।
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