जिले में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मलेरिया केसों की संख्या पांच सौ के करीब पहुंच गई है। वहीं जिले में पहली बार चिकनगुनिया भी पांव पसार रहा है। इसके रोगियों की संख्या चार हो गई है। उधर, डेंगू रोगियों का आंकड़ा 22 तक पहुंच गया है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में मलेरिया रोगियों की संख्या 488 हो गई है। इसमें 13 मरीज प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम मलेरिया (पीएफ) के हैं। पीएफ मलेरिया काफी घातक होता है और इसमें पीड़ित की जान भी जा सकती है। मलेरिया के सबसे अधिक मरीज खिजराबाद क्षेत्र में सामने आ रहे हैं। यमुना नदी के किनारे मच्छरों की भरमार होने से यह क्षेत्र मलेरिया के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। यहां मलेरिया के 181 केस सामने आ चुके हैं। इसके अलावा मुस्तफाबाद में 65, नाहरपुर में 50, रादौर में 56, साढौरा में 43 व बिलासपुर में 46 केस मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास मलेरिया स्टाफ की कमी मलेरिया से निपटने में बड़ी बाधा बनी हुई है।
ब्रेन में चढ़ जाता है पीएफ मलेरिया बुखार
मलेरिया दो प्रकार का होता है। एक प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम मलेरिया और दूसरा प्लाजमोडियम वाईवैक्स (पीवी)। प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम मलेरिया होने पर पीड़ित के ब्रेन में बुखार चढ़ जाता है, जिससे उसकी जान भी जान सकती है। जबकि प्लाजमोडियम वाइवैक्स दिमाग में नहीं चढ़ता। इसलिए पीएफ को अधिक घातक माना जाता है। प्लाजमोडियम मलेरिया की दवा पांच दिन तक लेनी पड़ती है। जबकि प्लाजमोडियम वाईवैक्स की दवा का कोर्स 14 दिन का होता है। दोनों प्रकार के मलेरिया पानी के जमाव में पनपने वाले मच्छरों से होते हैं। यमुनानगर जिले में हर साल प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम के केस सामने आते रहे हैं। वर्ष 2009 में जिले में पीएफ के 392 केस मिले थे। वहीं, 2010 में 200 केस थे। इसके अलावा 2011 में 211, 2012 में 131, 2013 में 36, 2014 में 12 व 2015 में 23 केस सामने आए थे।
जोड़ों में दर्द हो तो तुरंत करवाएं जांच
जिले में पहली बार चिकनगुनिया के केस सामने आए हैं। अब तक चिकनगुनिया के चार मरीज सामने आ चुके हैं। इस बीमारी के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। चिकनगुनिया पीड़ित को बुखार के साथ-साथ जोड़ों में तेज दर्द होता है। इसे पूरी तरह ठीक होने में समय लग जाता है। विभाग द्वारा जगाधरी के सिविल अस्पताल में चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध हो गई है। सरकारी लैब में अब तक चिकनगुनिया के 31 टेस्ट किए गए हैं, जिनमें चार पोजिटिव पाए गए।
सरकारी लैब में करवाएं डेंगू की जांच
जिले में डेंगू पोजिटिव केसों की संख्या 22 हो गई है। जबकि एक व्यक्ति की डेंगू से मौत हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पीड़ित को डेंगू के अलावा अन्य बीमारियां भी थी। जगाधरी के सिविल अस्पताल में डेंगू के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है, जो कि मुफ्त में की जाती है। सरकारी लैब में अब तक डेंगू के 210 ब्लड सैंपल के टेस्ट किए गए, जिसमें 22 पोजिटिव पाए गए। प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू कार्ड से डेंगू का टेस्ट किया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस कार्ड की रिपोर्ट को पूरी तरह सही नहीं मानता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले साल जिले में डेंगू पीड़ितों की संख्या 122 थी। आने वाले दिनों में डेंगू रोगियों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
जिले में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के केस सामने आ रहे हैं। खिजराबाद क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप सबसे अधिक है। पानी के जमाव से मच्छर तेजी से पनपते हैं इसलिए अपने घरों व आसपास पानी खड़ा न होने दें। अब सरकारी लैब में चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है।
डॉ वीके जैन, उप सिविल सर्जन व जिला मलेरिया अधिकारी।