राहत बनकर बरसा पानी गांव पोटली निवासी परिवार के लिए आफत बन गया। भारी बारिश से परिवार का मकान ढह गया। यह हादसा बेहद दर्दनाक हो सकता था, लेकिन छत गिरने से पहले ही परिवार कमरे की दीवार के साथ सटकर खड़े हो गए, जिस कारण उनकी जान बच गई। अन्यथा यह बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन इससे उनका घरेलु सामान नष्ट हो गया है। छत गिरने की आवाज से आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। छह गिरने के बाद परिवार ने फिलहाल अपना सामान धर्मशाला में रख तो लिया है, लेकिन ऐसे में उनके रहने की परेशानी मुंह बाए खड़ी हो गई है। बता दें कि इसी मकान की छत पिछले साल भी बारिश के कारण ढ़ह गई थी। लेकिन परिवार पक्का मकान बनाने की स्थिति में नहीं है, वहीं उसे किसी प्रकार की प्रशासनिक व सरकारी सहायता भी नहीं मिल पाई है। फिलहाल परिवार के पास रहने के लिए छत नहीं है। जिससे कारण परिवार का बुरा हाल हो गया है।
गांव पोटली निवासी सतीश कुमार ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ कच्चे छत के मकान में रहता है। बुधवार से ही भारी बारिश हो रही थी। देर रात उसकी छत से पानी टपकने लगा। परिवार किसी तरह रात को सो गया। वीरवार तड़के पांच बजे उसे छत के खिसकने की आवाज सुनाई दी। जिससे उसकी नींद टूट गई और देखा छत गिरने वाली है। उसने आनन फानन में पत्नी व परिवार को जगाया और मकान की दीवार के साथ सटाकर खड़ा कर दिया। वह भी दीवार के साथ खड़ा हो गया। परिवार के उठने के दो मिनट के भीतर ही छत भरभरा कर गिर गई। समय पर नींद टूटने के कारण परिवार की जान तो बच गई, लेकिन घर सारा सामान नष्ट हो गया।
सतीश ने बताया की पिछले साल भी उसके मकान की छत भी ढह गई थी। छत गिरने के बाद उन्होंने अपना सामान गांव की धर्मशाला में रखा हुआ है। सतीश ने बताया कि दूसरे मकान की छत भी ढ़ह जाने के बाद उसे व परिवार को रहने की चिंता सता रही है। दिन भर परिवार बारिश में बचा हुआ सामान बटौरने में लगा रहा। सतीश ने बताया कि कई साल पहले उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था। लेकिन उसका इसमें नंबर नहीं आया। प्रशासन से भी मकान की मरम्मत के लिए गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सहायता नहीं मिली। सतीश ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए वह दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। लेकिन सब जगह गुमराह कर आज तक उसे टरकाया जा रहा है। इस योजना के असली हकदारों को योजना का कोई लाभ नहीं दिया जा गया।