सरकार से बजट में राहत की उम्मीद लगाए लोगों को भारी निराशा हुई है। बजट में किसी वर्ग को कोई विशेष छूट व राहत नहीं दी गई। वहीं आम आदमी के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया। लोगों को बजट से आयकर में छूट दिए जाने की अपेक्षा थी। जबकि व्यापारी भी तमाम तरह के कर में छूट चाहते थे। इसके अलावा उद्यमी भी सरकार से ऋण व एमएसएमई के तहत राहत देने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को जारी बजट से सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। व्यापार व उद्योग जगत ने इसे औपचारिक बजट बताया है। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में जो प्रावधान आसानी से किए जा सकते थे, उन पर ध्यान तक नहीं दिया गया। आम आदमी को आयकर में कोई राहत नहीं दी गई। जबकि इसकी बहुत जरूरत थी। सभी वर्गों ने इसे औपचारिक बजट बताया है, जिससे उन्हें निराशा मिली है।
व्यापारी वर्ग को कोई राहत पैकेज नहीं दिया गया। सरकार अपनी नीतियों में साल भर बदलाव करती रहती है, जो काम बजट में होता था। उन नीतियों को सरकार अपनी सुविधानुसार लागू करती रहती है। ब्याज में किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई। सरकार से भारी निराशा मिली है।
-महेंद्र मित्तल, प्रदेशाध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा।
दो साल से बाजार मंदी की मार झेल रहा है। कई व्यापारी कारोबार तक बंद कर चुके हैं। ऐसे में सरकार को व्यापार करने व कर में छूट देनी चाहिए थी। व्यापारी इसकी लंबे समय से मांग कर रहे हैं, परंतु इस बजट में उनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया है। व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
-संजीव गुप्ता व्यापारी जगाधरी।
मंदी के कारण व्यापारी भारी ऋण के बोझ में दबा पड़ा है। जिस कारण आर्थिक मंदी बढ़ती जा रही है। इसी के चलते बाजार से रोजगार की संभावनाएं भी क्षीण हो गई हैं। व्यापारियों ने सरकार से ऋण में छूट देने की मांग की थी, परंतु ऐसा नहीं किया गया।
-व्यापारी नेता राजेंद्र बजाज।
सरकार का बजट केवल अपेक्षाओं पर आधारित है। जबकि बजट के जरिए गिरी अर्थव्यवस्था को सहारा देना चाहिए था। मंदी के कारण घरेलू उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने इस वर्ग को उभारने के लिए कोई योजना व प्रावधान नहीं किया। ऐसे में हालात और गंभीर हो जाएंगे।
-संजय मित्तल, व्यापारी नेता।
केंद्र सरकार ने अपना आम बजट पेश किया है। परंतु इसमें आम आदमी के नाम कुछ नहीं रहा। सालों से जो योजनाएं व प्रावधान हैं, उन्हें नई भाषा में पेश किया गया है। इस समय बेरोजगारी से निपटने के लिए विशेष कार्य करने की आवश्यकता थी, जो नहीं किया गया। बजट में डिजिटलाइजेशन की बात की गई, परंतु मूल समस्या लोगों तक शिक्षा पहुंचाना है। शिक्षा क्षेत्र में भारी निराशा मिली है।
-शिक्षाविद् डॉ. विकास दरयाल।
देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है। वहीं दो वर्ष में कोरोना संक्रमण के प्रभाव के कारण लाखों का रोजगार छिन गया है। बजट में बेरोजगारी दूर करने के लिए प्रावधान रखा जाना चाहिए था। परंतु इस ओर कोई काम नहीं किया गया है। रोजगार के अवसर उत्पन्न करने की बात कही गई, जो हर साल कही जाती है। इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। युवाओं को इससे भारी निराशा मिली है।
-शिक्षाविद प्रो. गिन्नी सियाल।
मूल जरूरत की वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से बाहर
महंगाई कम करने के लिए सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। कुछ सामान सस्ते हुए हैं, लेकिन वे मूल जरूरत के नहीं हैं। जबकि मूल जरूरत की सभी वस्तुएं आम आदमी के बस से बाहर हो रही हैं। सरकार ने बजट में महंगाई बढ़ने की तरफ इशारा किया है।
-गृहिणी, सुमन लता।
आम बजट में कहीं आम आदमी की बात नहीं की गई। सरकार ने महंगाई बढ़ने की बात कही है। जबकि महंगाई के कारण पहले ही लोगों की कमर टूट गई है। वे गृहिणी होने के साथ-साथ काम भी करती हैं, लेकिन घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई ही बेहद महंगी है, वहीं रसोई की हर वस्तु पहुंच से दूर है। ऐसे में इन पर राहत देनी चाहिए थी।
-गृहिणी आरती शर्मा।
कें द्रीय वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया है उसमें मध्य वर्ग के टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन गंगा किनारे ऑर्गेनिक फार्मिंग करने का सुझाव, आईटीआर में गड़बड़ी सुधारने का मौका देना, पेंशन में छूट देना अच्छे प्रयास हैं। 60 लाख नई नौकरियां, ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहन, 5जी सेवा से गांवों का जोड़ना, ई चिप वाले पासपोर्ट, पोस्ट ऑफिस को कोर बैंकिंग से जोड़ना, आरबीआई का डिजिटल करेंसी को लाना, देश की व्यवस्था में परिवर्तन करेगा।
सरकार को एमएसएमई की ब्याज दर में छूट देनी चाहिए थी। उद्योगों को फिर से गति प्रदान करने के लिए कर व नियमों में राहत देने की उम्मीद पर धराशायी हो गई है। नए उद्योगों को ऋण में अगले साल तक की छूट दी गई है, परंतु अन्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उद्यमियों की चिंता जस की तस बनी हुई है।
-जेके बिहानी, प्रधान, हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
प्लाइवुड व मेटल उद्योग भारी मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। यह उद्योग सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करते हैं। इन दिनों बर्बादी के कगार पर है। सरकार ने कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाया है। उद्यमियों को आशा थी कि विदेश से आने वाले कच्चे माल पर शुल्क कम किया जाएगा, लेकिन बजट में उद्योगों के लिए प्रावधान नहीं किया गया।
-देवेंद्र चावला, प्रेसिडेंट ऑल इंडिया प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
कोरोना संक्रमण के कारण भी उद्योगों को भारी नुकसान हुआ है। गत बजट में भी सरकार ने उद्योगों को उबारने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया था, वहीं इस बार भी उद्योगों को कुछ नहीं दिया गया है। इससे भारी निराशा हुई है। उद्योगों के उभरने से रोजगार उत्पन्न होंगे और लोगों को भारी राहत मिलेगी।
यमुनानगर। तिलक राज चड्ढा तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थान में विद्यार्थियों ने बजट सुना। बजट सुनने के बाद विद्यार्थियों ने सामूहिक चर्चा की। विद्यार्थियों ने इसे औपचारिक बजट बताया। उन्होंने कहा कि बजट से सभी वर्गों को विशेष राहत की उम्मीद थी। लेकिन लोगों की उम्मीदों के अनुरूप कुछ नहीं प्राप्त हुआ। विद्यार्थियों ने बजट नाकार दिया। विद्यार्थियों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण सभी क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे उबरने के लिए सरकारी राहत की जरूरत थी। आम बजट में आम आदमी की बात नहीं की गई।
छात्रा मुस्कान ने कहा कि यह अधूरा है, बाकी बजट तीन फरवरी को जारी होगा। लेकिन आज के बजट से ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बजट बेहद निराशा पूर्ण रहा। इसमें किसी वर्ग को कुछ नहीं दिया गया। कई क्षेत्रों के लिए प्रावधान किया गया है, जो मात्र योजना है। यह युवाओं की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा पाया है।
छात्रा आशी ने कहा कि बजट बड़ा ही उलझन भरा रहा है। जिसमें सभी को अपने सेक्टर के बारे में समझने में परेशानी हो रही है। बजट में किसी सेक्टर को कुछ नहीं मिला है। जिन मूल मुद्दों व समस्याओं से राहत की जरूरत थी, उनका इनमें कहीं जिक्र ही नहीं किया गया।
छात्र शुभम ने कहा कि बजट से शिक्षा क्षेत्र के लिए काफी उम्मीद थी। तकनीकी व पेशा विशेष पढ़ाई में राहत देने की आशा व्यक्त की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सबसे ज्यादा समस्या शिक्षा की है, शिक्षा हर दिन महंगाई होती जा रही है। जिस पर अंकुश लगाने की जरूरत थी।
छात्र जतिन ने कहा कि डिग्री हासिल करने के बाद भी करोड़ों युवा बेरोजगार हैं। आईटी और प्रबंधन क्षेत्र में रोजगार के अवसर होते थे, लेकिन दो साल से इन क्षेत्रों के लोगों ने अपना रोजगार गंवा दिया है। बजट में रोजगार उत्पन्न करने के लिए पैकेज की आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें मिला कुछ नहीं है।