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Yamuna Nagar News: नाती-पोतों की अंगुली थामकर साक्षरता की राह पर बढ़े बुजुर्ग

Mon, 21 Sep 2026 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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उल्लास की परीक्षा देतीं बुजुर्ग। विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। चेहरों पर वक्त की झुर्रियां और कमजोर मांसपेशियां, शिथिल काया, बिना चश्मे के आंखों से कुछ दिखता नहीं है, लेकिन मन में पढ़ने का उत्साह है। कांपते हाथों में किताब और नाती-पोतों की उंगली पकड़कर साक्षरता की ओर कदम बढ़ा रहे बुजुर्गों ने अपने जज्बे से साबित कर दिया कि पढ़ने की सिर्फ चाह होती है, कोई उम्र नहीं होती है।

जिले के बुजुर्गों ने रविवार को शिक्षित बनने के लिए परीक्षा देकर यह संदेश दिया। यह परीक्षा शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 110 केंद्रों पर सुबह नौ से शाम पांच बजे तक करवाई गई। इसके लिए 450 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। परीक्षा में भाग लेने के लिए जिलेभर में कुल 110 केंद्र बनाए गए थे।
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उल्लास के लिए जिलेभर से 3500 अधेड़ व बुजुर्गों ने आवेदन किया था। रविवार को कुल 2,060 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। वहीं, जिला जेल में 24 बंदियों ने परीक्षा दी। अब यह बुजुर्ग बैंक या किसी कार्यालय में जाएंगे तो किसी कर्मचारी से पूछना नहीं पड़ेगा कि अंगूठा कहां लगाना है। अब फार्म भरकर बुजुर्ग स्वयं ही हस्ताक्षर कर सकेंगे।

अब वे फार्म इत्यादि भरने के लिए किसी के मोहताज नहीं रहेंगे। उम्र के अंतिम पड़ाव में नाती-पोतों को कहानियां सुनाने वाले बुजुर्गों ने परीक्षा देकर अपनी कहानी लिखी है। परीक्षा उल्लास कार्यक्रम के जिला समन्वयक एवं गणित विशेषज्ञ संजय कांबोज के नेतृत्व में करवाई गई। परीक्षा सुबह नौ से शाम पांच तक हुई और इसमें आने के लिए आवेदकों को किसी प्रकार की समय की पाबंदी नहीं थी।

जगाधरी जेल से 24 बंदियों ने दी परीक्षा

जगाधरी खंड के 609 ने परीक्षा दी। साढौरा में 260, सरस्वतीनगर में 226, छछरौली में 356, रादौर में 246 और व्यासपुर में 363 अभ्यर्थियों ने परीक्षा। वहीं, जगाधरी जेल से 24 बंदियों ने परीक्षा दी। जिला जेल से कुल 137 ने पंजीकरण करवाया था, लेकिन परीक्षा में मात्र 24 ही बैठे।
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84 वर्षीय हजरो देवी बनीं प्रेरणा

साढौरा के गांव रतौली की 84 वर्षीय हजरो देवी में भारी उत्साह देखने को मिला। उम्र ज्यादा होने के कारण उनकी परीक्षा घर पर ही करवाई गई। इसके लिए विभाग की ओर से एक शिक्षक की ड्यूटी लगाई गई थी। हजरो देवी ने कहा कि पहले उन्हें अनपढ़ कहा जाता था, लेकिन अब वह भी पढ़ी-लिखी हैं। अब बैंक में उन्हें अंगूठा नहीं लगाना होगा। वह हस्ताक्षर करेंगी। हजरो देवी ने बताया कि पोते-पोतियों को देखकर उन्हें पढ़ने की इच्छा जागी थी। आयु के अंतिम पड़ाव में उनका यह जुनून सभी के लिए प्रेरणा है।

उल्लास की परीक्षा देतीं बुजुर्ग। विभाग

उल्लास की परीक्षा देतीं बुजुर्ग। विभाग

उल्लास की परीक्षा देतीं बुजुर्ग। विभाग

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