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Yamuna Nagar News: यमुनानगर से जुड़ा नाम बदलने का इतिहास

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दीपेंद्र कुमार
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यमुनानगर। हरियाणा का प्रवेश द्वार कहलाए जाने वाले यमुनानगर ने कई बदलाव देखें हैं। महाभारत कालीन इतिहास की धरोहर समेटे यमुनानगर की पहचान समय-समय पर बदलती रही है।
सरकार ने यमुनानगर की तहसील बिलासपुर का नाम बदलकर व्यासपुर कर दिया। जिससे एक बार नाम बदलने को लेकर यमुनानगर भी चर्चाओं में है। क्योंकि, यमुनानगर जिले का जन्म भी नाम बदलने के इतिहास से अछूता नहीं रहा। इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो ब्रिटिश काल में अब्दुलापुर के नाम से जाना जाने वाला शहर आजादी के बाद जमना नगर और अब यमुनानगर के नाम से पहचाना जाने लगा।
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ब्रिटिश काल में यमुनानगर था पंजाब प्रांत का हिस्सा : ब्रिटिश काल में यमुनानगर पंजाब प्रांत का हिस्सा था। यमुना नदी के किनारे बसा होने के कारण यह इलाका काफी समृद्ध माना जाता था।
जिस कारण वर्ष 1867 में ही जगाधरी को नगर पालिका बना दिया गया। पालिका से सटा हुआ ही अब्दुलापुर गांव होता था।
यह गांव जगाधरी रेलवे स्टेशन के आस-पास था। जैसे-जैसे आबादी बढ़ी तो गांव का विकास होता गया और वर्ष 1942 में ब्रिटिश सरकार ने अब्दुलापुर गांव को नगर पालिका का दर्जा दे दिया।आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन जागधरी पहुंचे थे।
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जिनके रहने के लिए स्टेशन के आस-पास कैंप लगाए गए थे। कैंप को जमना गली का नाम दिया गया था। आगे चलकर यही अब्दुलापुर का नाम हो गया। पहले जमना नगर के नाम से पहचान बनी और धीरे-धीरे यमुनानगर हो गया। यमुनानगर पहले अंबाला जिले का हिस्सा था। नवंबर 1989 में अलग यमुनानगर के नाम से अलग जिला बना दिया गया था। संवाद
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