यमुनानगर। खंड छछरौली के गांव लेदी में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड) 2.0 के तहत वाटरशेड कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ जिला परिषद के चेयरमैन रमेशचंद ठसका व जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र सिंह ढुल ने किया। उन्होंने पौधरोपण भी किया।
कार्यक्रम में जिला परिषद चेयरमैन रमेशचंद ठसका ने कहा कि भारत सरकार द्वारा जो वाटरशेड योजना चलाई जा रही है। इसमें सभी क्षेत्रवासियों का सर्वांगिक विकास करने पर ध्यान दिया जा रहा है। इस वाटरशेड यात्रा के माध्यम से सभी वाटरशेड क्षेत्र के गांवों में योजना से संबंधित किए जाने वाले कार्यों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि लोगों को योजना से अधिक से अधिक लाभ मिल सके। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र सिंह ढुल ने कहा कि इस योजना में जो बेरोजगार युवा अपना कोई कार्य शुरू करना चाहते हैं।
मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन व केंचुआ खाद उत्पादन जैसे कार्य योजना के माध्यम से कर सकता है। जिन किसानों के पास भूमि कम है, वह भी इन कार्यों को करके आय बढ़ा सकते हैं। जल बचाने व वर्षा जल संचय पर जोर देते हुए वीरेंद्र सिंह ढुल ने कहा कि योजना से सभी किसान वर्षा जल व जल बचाने के लिए खेतों में चेक डैम लगवाना और सभी पंचायतें अपने सार्वजनिक स्थानों पर वर्षा जल संचय के लिए रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर लगवाना सुनिश्चित करें। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी नरेश कुमार द्वारा जल व भूमि संरक्षण के बारे में किसानों व प्रोजेक्ट क्षेत्र से आए लोगों को अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि वाटरशेड महत्वपूर्ण योजना है, क्योंकि इसमें भूमि व जल संरक्षण के बारे में भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
योजना के तहत जिन गांवों में दो जोहड़ हैं। उनमें जोहड़ों को भूमिगत पाइप लाइन के माध्यम से जोड़ने का कार्य किया जाता है। इससे गांव के पानी से हो रहे नुकसान से किसानों को निजात मिली है।
इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट क्षेत्र के गांवों में जोहड़ों पर रिटेनिंग वाल के कार्यों को भी किया गया है। जिला वाटरशेड सेल के तकनीकी विशेषज्ञ राम कुमार ने योजना संबंधित सभी क्रियाकलापों के बारे में बताया। कहा कि भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत प्रोडक्शन सिस्टम मद के तहत फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वाटरशेड योजना से प्रोजेक्ट क्षेत्र के किसानों को अपना समूह (एफपीओ) बनाकर लाभ उठाना चाहिए।
योजना से किसान अपने खेतों में नाके, चैक डैम व एग्रो फोरेस्ट्री के कार्य कराना चाहता है। वह वाटरशेड कमेटी के माध्यम से खेतों में कार्य को करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान पानी की पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें गांव लेदी के सरपंच व अन्य वाटरशेड कमेटियों के प्रधान, सरपंच, सचिव, किसान व स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने पानी बचाने से संबंधित सुझाव साझा किए।