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हिंदी हैं हम: हिंदी के आगे बढ़ने से देश की और ज्यादा तरक्की होगी

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हिंदी देश की वह भाषा है जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोए हुए है। भाईचारा भी इसके जरिये कायम है। यह भाषा तेजी से सरकारी कार्यालयों में प्रयोग की जा रही है। राज्य सरकार को भी इस पर ध्यान देना होगा। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान में शहरवासियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। लोगों का मानना है कि हिंदी के आगे बढ़ने से देश की और तरक्की होगी।
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हिंदी भाषा बोलने से हर किसी को गर्व महसूस होता है, क्योंकि इस भाषा का जुड़ाव सीधे हिंदुस्तान से है। हिंदी के लिए सरकारें रोजगार के रास्ते निकाले ताकि लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। शिक्षण संस्थानों में हिंदी के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। अधिक से अधिक विद्यार्थी प्रवेश लेंगे तो हिंदी का प्रयोग और बढ़ेगा। -रंजन शर्मा
हिंदी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से प्राणवायु की तरह रही है। हिंदी में अपार संभावनाएं हैं और हिंदी के बल पर बड़ी से बड़ी सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। हिंदी के प्रति अंतर्मन में आदर भाव हो, तभी हिंदी सार्थक है। आज हिंदी भारत और विदेश दोनों जगह अपना ध्वज फहरा रही है। हिंदी की अनिवार्यता से हिंदी के प्रति आदर भाव और भी विकसित होगा। -लक्ष्य दत्ता
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बोलचाल में हिंदी के अलावा अरबी, उर्दू और फारसी के शब्दों का प्रयोग करते हैं। ऐसा नहीं है कि हिंदी में इन शब्दों का कोई विकल्प नहीं है। जानकारी के अभाव में चले आ रहे प्रचलन के कारण ये शब्द हमारे दिमाग में घर कर गए हैं। हमें हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बोलचाल में हिंदी के शब्दों को स्थान देते हुए गैर भाषा के शब्दों को बाहर करना होगा। -कंचन मेहता
हमें हिंदी के ज्ञान और बढ़ाने के साथ ही बोलचाल में भी इसका शुद्ध प्रयोग करना होगा। तभी बदलाव आएगा। जब भी हिंदी से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन होता है तो हिंदी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन बाद में सभी ये भूल जाते हैं। हमें हिंदी की दशा सुधारने के लिए सतत प्रयास करना होगा। अमर उजाला का हिंदी हैं हम अभियान एक बड़ा प्रयास है। -महेश सिंहल
हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध भाषा होने के साथ हमारी राष्ट्र भाषा है। ऐसा नहीं है कि हिंदी का महत्व कम है। हिंदी सबसे ज्यादा बोली जानी वाली भाषा है। वर्तमान में सभी अंग्रेजी सीखना चाहते हैं और हिंदी के उपयोग से बचता है। हिंदी भाषा को महत्व देने की शुरुआत हमें अपने घरों से करनी चाहिए। हिंदी का उपयोग सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में करना होगा। -डॉ. सौरभ आर्य
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