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Yamuna Nagar News: हाईकोर्ट ने दादूपुर-नलवी नहर को डी-नोटिफाइ करने व कानून 101ए को किया निरस्त

Tue, 31 Dec 2024 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। हरियाणा सरकार के दादूपुर-नलवी नहर को डी- नोटिफिकेशन के आदेशों व बनाए गए कानून 101ए को असांवैधानिक करार देते हुए हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। हाई कोर्ट के डबल बैंच वाली पीठ के इस आदेश से किसानों में खुशी का माहौल है। अब नहर के लिए जमीन देने वाले किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिलने और नहर के फिर से शुरू होने की उम्मीद जग गई है। यदि दादूपुर-नलवी नहर फिर से शुरू होती है तो 223 गांवों के किसानों व लोगों को पानी मिलेगा।
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दादूपुर-नलवी संघर्ष समिति यमुनानगर के अध्यक्ष कश्मीर सिंह ढिल्लों व अन्य सदस्यों ने बताया कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2018 में नया कानून 101ए बनाया था। जिसके तहत सरकार किसी भी समय किसान की जमीन का अधिग्रहण कर सकती है। इसके तहत यदि प्रोजेक्ट ठीक नहीं है तो जमीन वापस की जा सकती है। इस कानून के तहत सरकार ने दादूपुर-नलवी नहर को डी-नोटिफाई करते हुए बंद करके किसानों की जमीन वापस करने का निर्णय लिया। तब जिले के किसानों ने दादूपुर-नलवी संघर्ष समिति यमुनानगर का गठन किया था। डी-नोटिफाइड के खिलाफ किसान हाई कोर्ट में चले गए। इसकी सुनवाई के लिए कोर्ट ने एक स्पेशल बैंच गठित की। बैंच ने 20 दिसंबर 2024 को दिए गए आदेशों में हरियाणा सरकार के कानून 101ए व डी-नोटिफाइ दोनों को निरस्त कर दिया।
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2005 में जमीन अधिग्रहण हुआ था शुरू
सरकार ने दादूपुर-नलवी नहर के लिए वर्ष 2005 में जमीन अधिग्रहण शुरू किया था। खोदाई के बाद 2008 में प्रोजेक्ट पूरा हो गया तो 2009 में पहली बार नहर में पानी छोड़ा गया। 2017 तक इसमें दादूपुर हेड से पानी छोड़ा गया। नहर बनाने का मुख्य उद्देश्य ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करना था। सरकार ने भी माना था कि जब से नहर शुरू हुई है तब से ग्राउंड वाटर रिचार्ज हुआ है। दादपुर हेड से नलवी तक 50 किलोमीटर लंबी नहर खोदने के लिए तब 223 गांवों के किसानों ने 1026 एकड़ जमीन दी थी। संघर्ष समिति के पदाधिकारी राजेश दहिया व अर्जुन सुढैल ने बताया कि 2005 में सरकार ने किसानों को प्रति एकड़ पांच लाख से 14 लाख रुपये तक मुआवजा दिया गया। औसतन प्रत्येक किसान को आठ लाख रुपये मुआवजा मिला था। मुआवजा कम मिलने पर किसान सेशन कोर्ट में गए तो वहां से 2 से 2.50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा बढ़ाकर देने के आदेश हुए। तब तक मार्केट रेट के हिसाब से जमीन का रेट 40 से 45 लाख रुपये प्रति एकड़ हो चुका था। इसलिए तब किसान हाई कोर्ट गए। कोर्ट से पांच मई 2016 को निर्णय आया कि 1.16 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए लेकिन सरकार ने बढ़ा हुआ मुआवजा देने के बजाय नहर को ही बंद कर जमीन वापस देने का निर्णय लिया।
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किसान नहीं कर सकते जमीन को उपजाऊ व समतल
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा निविदा के माध्यम से नहर की मिट्टी को उठाकर बेच दिया गया। उच्च न्यायालय ने वन विभाग व सिंचाई विभाग से भी सलाह ली थी। जिसमें उन्होंने माना था कि नहर को बंद करके न तो इसे उपजाऊ किया जा सकता है और न ही समतल। सीमित संसाधनों में किसान भी इसे उपजाऊ नहीं कर सकते थे। समिति द्वारा नहर बचाने के लिए डेढ़ साल तक स्थायी धरना अनाज मंडी जगाधरी गेट पर दिया गया। वहीं 80 किलोमीटर पैदल मार्च भी निकाला गया। किसानों का कहना है कि बकाया मुआवजा राशि की मांग को लेकर किसान न्यायालय में दावा पेश करेंगे। इस मौके पर किसान पवन गुगलो, सुभाष कांबोज, अशोक कांबोज, दलबीर सुढल, कृष्ण सैनी, सोमनाथ सैनी, अनिल सहित अन्य उपस्थित रहे।

कथा में उपस्थित श्रद्धालु कथा का आनंद लेते हुए। संवाद

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