जहरीली शराब से मौतों के मामले में प्रदर्शन कर रहे बसपा कार्यकर्ताओं व पुलिस में लघु सचिवालय प्रांगण में प्रवेश को लेकर तीखी बहस हुई। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीसी कार्यालय गेट पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर वहीं रोक दिया। परंतु प्रदर्शनकारियों ने बेरिकेड्स हटाकर अंदर जाने का प्रयास किया तो टकराव की स्थिति बन गई। जिस पर पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभालते हुए मामला शांत किया। प्रदर्शनकारी अंदर जाकर डीसी को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने गेट पर रोक दिया। जिसके बाद अधिकारियों ने समझा बुझाकर पार्टी के पदाधिकारियों को अंदर जाने दिया। जबकि अन्य कार्यकर्ता गेट पर ही डटे रहे। इस दौरान डीसी की अनुपस्थिति में एडीसी आयुष सिन्हा ने ज्ञापन स्वीकार किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेशाध्यक्ष राजवीर सरोखी, रवि चौधरी, जिलाध्यक्ष राहुल फिरोजपुर ने किया। इस दौरान बसपा ने जहरीली शराब पीने से मौतों का जिम्मेदार सरकार को बताया। राजवीर सरोखी ने कहा कि प्रदेश में सरकार के संरक्षण में जहरीली शराब का कारोबार किया जा रहा है। इससे पहले 2020 व 2022 में जहरीली शराब पीने से मौत के मामले सामने आए हैं। परंतु सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिले में मौताें का सिलसिला शुरू हुआ तो सीएम यही पर थे। परंतु वे पीड़ितों के घर नहीं गए। वहीं अभी तक इस मामले में सरकार के किसी मंत्री व नेता ने पीड़ितों का हाल नहीं जाना है। इससे सरकार की गंभीरता का पता चलता है। बसपा ने राज्यपाल के नाम एडीसी आयुष सिन्हा को ज्ञापन सौंपा। जिसमें बसपा ने मृतकों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी, मुफ्त शिक्षा दी जाने की मांग की गई। वहीं पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत के मामले की जांच एसआईटी से करवाई जाए और एसआईटी में एक सदस्य अनुसूचित जाति से शामिल किए जाने की बात कही। एडीसी आयुष सिन्हा ने मांगपत्र आला अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन में जिप सदस्य धर्मपाल तिगरा, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।