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आयुष्मान योजना: जरूरतमंदों को इलाज देने में दूसरे नंबर पर यमुनानगर

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सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बनते है आयुष्मान कार्ड। - फोटो : YAMUNA NAGAR
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जिले में आयुष्मान योजना को शुरू हुए एक साल बीत गया। धरातल की बात करें तो राज्य में दूसरा ऐसा जिला है जो सुविधाएं देने में अग्रणी है। इसका अंदाजा सिविल अस्पताल में लग रही लोगों की लाइनों से लगाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत है, लेकिन लोगों के मुताबिक इस योजना से उन्हें काफी राहत मिली है। आयुष्मान योजना के तहत जिले से 5019 पात्र इसका लाभ पा चुके हैं। जिनमें प्राइवेट अस्पतालों से 3682, सिविल अस्पताल यमुनानगर से 660, जगाधरी अस्पताल से 531 तथा सीएचसी (रादौर, नाहरपुर, साढ़ौरा, सरस्वती नगर व बिलासपुर) से 154 ने अभी तक लाभ पाया है। इनपर तीन करोड़ 90 लाख का खर्च आया है। अभी तक एक लाख 30 हजार कुल कार्ड बने हैं व 93 हजार ऐसे परिवार रहे जिनके दस्तावेज सही न होने पर कार्ड नहीं बन पाए।
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योजना के शुरूआत में इतने जुड़े थे अस्पताल : 23 सितंबर 2018 को आयुष्मान योजना शुरू हुई थी। वहीं जिला में इस योजना के शुरू होने पर 10 पैनल पर अस्पताल थे और वर्तमान में 22 संख्या हो चुकी है। जिनमें पात्र योजना का लाभ ले रहे हैं।
ऐसे किया गया योजना का प्रचार-प्रसार : इस योजना का प्रचार-प्रसार करने के लिए 22 सक्षम युवाओं को जोड़ा गया। जिसमें 11 टीमों का गठन किया गया। हर टीम चार-चार सदस्य शामिल रखे गए। जो वार्ड तथा ब्लॉक वाइज गांवों में जाकर नुक्कड़ नाटक, बैठक तथा पंपलेट बांट कर लोगों को योजना के प्रति जागरूक किया गया।
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प्रदेश में दूसरे नंबर पर : यमुनानगर जिला राज्य में दूसरे नंबर पर सुविधा देने में आगे रहा है। केवल पात्रों की संख्या कम है जबकि अन्य जिलों की अपेक्षा यहां 55 फीसदी लोग यहां के अस्पतालों में योजना का लाभ ले रहे हैं।
ये अस्पताल जुड़े आयुष्मान योजना से : स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशलिट, आई क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड, महेंद्रा अस्पताल, एनके यूरोलोजी मैटरनिटी, गोयल अस्पताल, गाबा अस्पताल, गर्ग ईएनटी अस्पताल, कपिल अस्पताल, अग्रवाल अस्पताल, गोयल आई केयर सेंटर जगाधरी, गुलाटी अस्पताल, विशाल अस्पताल, कोहली अस्पताल, वरदान अस्पताल, संतोष अस्पताल, केयर पार्टनेर्स हार्ट सेंटर आदि शामिल हैं।
जिनमें नहीं विशेषज्ञ डॉक्टर वे योजना के पैनल में नहीं : जिन अस्पतालों में इस आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है, उनमें विशेषज्ञ डॉक्टर हैं तथा जिनमें नहीं है वे अस्पताल योजना के पैनल में नहीं आते हैं, इसलिए मरीज को पैनल में आने वाले अस्पताल में ही भेजा जाता है। इतना ही नहीं जिन अस्पताल में आयुष्मान योजना है उनमें बाकायदा बोर्ड भी लगाया है।
काट रहे हैं चक्कर, नहीं बन पाया कार्ड : संजय कॉलोनी के 70 वर्षीय एसके गोयल ने कहा कि 2011 में एक सर्वे किया गया था। जिसमें जबकि उसने दस्तावेजों की सभी फॉर्मेलिटी पूरी की थी। इसकी शिकायत उसने सीएम विंडो पर भी की लेकिन फिर भी उसका कार्ड नहीं बन पाया। उनका कहना है सरकार ने यह योजना इसलिए चलाई ताकि व्यक्ति इसका लाभ ले सके। जब उसका कार्ड नहीं बनाया जा रहा तो ऐसी स्कीम का क्या फायदा है।
मात्र 30 रुपये में कार्ड बनवा कर आप 5 लाख रुपये तक का मुफ्त में इलाज करा सकते हैं। इस कार्ड का नाम गोल्डन कार्ड जो आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़ा है। इस स्कीम में शामिल हर व्यक्ति को यह कार्ड बनवाना अनिवार्य है। कार्ड बनने के बाद ही उसका इलाज हो पाएगा। यह कार्ड नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर 30 रुपये का भुगतान करना होगा, और यदि सरकारी अस्पताल की मदद से कार्ड बनाते हैं तो आपको या फ्री में मिलेगा।
सरकार की आयुष्मान योजना काफी अच्छी है। इसके अनुसार मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है। हमारे पास जो मरीज आते हैं, उनका इलाज सरकार की हिदायतों के अनुसार किया जा रहा है।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, अस्पताल संचालक
राज्य में दूसरा जिला है जो आयुष्मान योजना की सुविधाएं देने में आगे है। इस योजना के अनुसार अब 5019 पात्रों को इसका लाभ मिल चुका है। इनपर तीन करोड़ 90 लाख रुपये तक खर्च आ चुका है तथा योजना के अनुसार 1395 बीमारियों का इलाज संभव है। जिले में आयुष्मान योजना पूरी तरह से सफल हुई है जिसका पात्र पूरा लाभ उठा रहे हैं।
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- डॉ. विजय दहिया, जिला नोडल अधिकारी, आयुष्मान विभाग।
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