यमुनानगर। वर्ष 2027 तक जिले को मलेरिया मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही डेंगू के केसों को कम करने के लिए भी अभियान चलेगा। इसके लिए जिला मलेरिया विभाग की सबसे ज्यादा नजर हाई रिस्क एरिया पर रहेगी। हाई रिस्क एरिया की पहचान करके वहां पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के रक्त के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाएगी। ताकि मलेरिया व डेंगू के संदिग्ध केस मिलने पर उनका उपचार कराया जा सके।
सरकार ने प्रदेश को 2027 तक मलेरिया मुक्त करने का अभियान रखा है। गत दो वर्षों से जिले में मलेरिया का केवल तीन केस ही मिले हैं। वर्ष 2024 में ही जिला मलेरिया मुक्त हो जाता, लेकिन लोकसभा चुनाव ड्यूटी में दूसरे राज्य से आए सीआरपीएफ का जवान मलेरिया से ग्रस्त हो गया था। जवान हजारों किलोमीटर का सफर करके पुलिस लाइन जगाधरी में ठहरा था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सफर के दौरान भी मच्छर काट सकता है। परंतु यह केस जिले के रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी का कहना है कि इस साल करीब एक लाख लोगों के रक्त की स्लाइड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। गत वर्ष विभाग की तरफ से 109033 स्लाइड बनाकर जांच की गई थी। जिन एरिया में मलेरिया व डेंगू के केस ज्यादा मिलने की संभावना ज्यादा रहती है वहां पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा।
आशा वर्करों पर होगी ज्यादा जिम्मेदारी
जिले को मलेरिया मुक्त करने और डेंगू पर शिकंजा कसने के लिए जिले की आशा वर्करों पर भी बहुत ज्यादा जिम्मेदारी होगी। क्योंकि जिले में एमपीएचडब्ल्यू के 130 में से 110 पद खाली पड़े हैं। जिले में 937 आशा वर्कर है। इसके लिए आशा वर्कर घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों के रक्त की स्लाइड बनाई जाएंगी। जिनकी जांच स्वास्थ्य विभाग की लैब में की जाएगी। इसके लिए प्रति स्लाइड आशा वर्करों को भुगतान किया जाएगा।
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गत पांच वर्षों में जिले में मलेरिया के मरीज
वर्ष मरीज
2020 03
2021 04
2022 01
2023 01
2024 02
गत पांच वर्षों में जिले में डेंगू के मरीज:
वर्ष मरीज
2020 36
2021 241
2022 932
2023 734
2024 190