संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों का शहादत दिवस पर शिक्षा विभाग की ओर से वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत निबंध लेखन के साथ सैंड ऑफ आर्ट शो करवाया गया। यह कार्यक्रम सरस्वती शिक्षण संस्थान के परिसर में हुआ। इसमें विद्यार्थियों ने सैंड आफ आर्ट से चार साहिबजादों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह, व फतेह सिंह के शहादत के लम्हों को अनोखे अंदाज में दिखाया।
कार्यक्रम हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से करवाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता ने किया। इस शो में एनएसबी के कलाकार ओम प्रकाश ने 10वीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों के जन्म, खालसा पंथ की स्थापना के बाद मुगल शासकों, सरहिंद सूबेदार वजीर खां द्वारा आक्रमण के बाद 20 व 21 दिसंबर 1704 में मुगल सेना से युद्ध, गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार सहित श्रीआनंदपुर साहिब किला छोड़ना, सरसा नदी पर गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार का बिछड़ने का घटनाक्रम दिखाया गया।
इस दौरान दिखाया गया कि गंगू ने लालच में आकर वजीर खां को गुरु गोबिंद सिंह की माता और छोटे साहिबजादों के उसके यहां होने की खबर दे दी। इसके बदले में वजीर खां ने उसे सोने की मोहरें दी, खबर मिलते ही वजीर खां के सैनिक माता गुजरी और सात वर्ष के साहिबजादा जोरावर सिंह और पांच वर्ष के साहिबजादा फतेह सिंह को गिरफ्तार करने पहुंच गए।
उन्हें लाकर ठंडे बुर्ज में रखा गया और उस ठिठुरती ठंड से बचने के लिए कपड़े का एक टुकड़ा तक न देना, रात भर ठंड में ठिठुरने के बाद सुबह होते ही दोनों साहिबजादों को वजीर खां के सामने पेश किया गया। जहां सभा में उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने को कहा गया, सभा में पहुंचते ही बिना किसी हिचकिचाहट के दोनों साहिबजादों ने जोर से जयकारा लगा जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल, यह देख सब दंग रह गए।
वजीर खां की मौजूदगी में कोई ऐसा करने की हिम्मत भी नहीं कर सकता, लेकिन गुरु जी की नन्हीं जिंदगियां ऐसा करते समय एक पल के लिए भी न डरीं के इतिहास को कला से दिखाया गया। इस दौरान वीर बाल दिवस विषय पर हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, संस्कृत भाषा में निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान डीएसएस विशाल सिंगल, मुकेश, संजय कांबोज, सतबीर चौहान, अनामिका वालिया सहित अन्य उपस्थित रहे।