अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर डेथ प्वाइंट के नाम से बदनाम कमानी चौक दुर्घटनाओं के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाया है। शहर का सबसे व्यस्तम चौक होने के बावजूद यहां दो तरफ खड़े हाईटेंशन तार के टॉवर यातायात व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इन्हें हटाने को लेकर डीसी द्वारा दिए आदेश भी नाकाफी साबित हुए, चूंकि 22 माह बाद भी कार्रवाई ढाक के तीन पात ही रही।
बता दें कि 17 फरवरी 2015 को डीसी डॉ. एसएस फूलिया ने शहर के चार मुख्य चौकों का निरीक्षण किया। इस दौरान यातायात व्यवस्था में सुधार और वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए उन्होंने संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश दिए। इसमें एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर कमानी चौक किनारे दो तरफ खड़े 66 केवीए हाईटेंशन तारों के टावर को हटाने व तारों को अंडरग्राउंड करने के आदेश दिए थे।
यह काम हरियाणा बिजली प्रसारण निगम को करना था, किंतु 22 माह बाद भी टावर ज्यों के त्यों खड़े हैं। इन टावरों की वजह से बाईपास पुल और आईटीआई मार्ग से आने वाले वाहनों को कन्हैया साहिब चौक जाने में और बस स्टैंड (जगाधरी वर्कशॉप रोड) की ओर से बाईपास पुल जाने में सड़क पर काफी कम जगह मिलती है। इससे चौक पर जाम की स्थिति में हादसों का ग्राफ भी बढ़ा है। बस स्टैंड से कुरुक्षेत्र व सहारनपुर को जाने के लिए चौक पर लाल बत्ती ऑन होने व जाम लगने पर रोडवेज बसे फंसी रहती हैं। इसके अलावा शहरवासियों सहित अन्य को भी इस परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है।
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डेथ प्वाइंट से बदनाम, फिर भी अधूरे इंतजाम:
एनएच-73 पर होने के कारण कमानी चौक 24 घंटे व्यस्त रहता है। इससे पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली सहित शहर का ट्रैफिक भी निकलता है। बावजूद इसके चौक पर यातायात को सुरक्षित व सुचारू रखने को कई तरह के इंतजाम अधूरे हैं। इनमें दोनों ओर खड़े हाईटेंशन तार के टावर सबसे अधिक आड़े आते हैं, जिन पर मौजूदा फोग सीजन में सुरक्षा के लिए रिफ्लेक्टर लगाए जाने के बजाए राजनीतिक पार्टियों सहित अन्य होर्डिंग नजर आ रहे हैं।
जबकि चौक पर जेब्राक्रॉसिंग, कैटआई, रेट्रो रिफ्लेक्टर वाले पूर्व सूचक व संकेतक बोर्ड व तीन तरफ स्लिप-वे का अभाव है। यही नहीं चौक पर हादसों के ग्राफ के मद्देनजर चालक को सचेत करने को कहीं भी खतरे का बोर्ड भी नहीं लगा है। जबकि बीते वर्षों में चौक पर हुईं सड़क दुर्घटनाओं के चलते यह डेथ प्वाइंट से बदनाम है। बीते वर्ष 2015 में 24 दिसंबर को चौक पर अज्ञात वाहन चपेट में आने से ऑटो सवार दुकानदार जोड़ियो निवासी अरुण (25) की मौत हो गई थी। इसके कुछ माह पहले इसी जगह एक्टिवा सवार मां-बेटी को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया था, जिसमें मां की मौत हो गई थी।
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कोर्ट के आदेश पर मंदिर तो गिराया पर अतिक्रमण बरकरार:
सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाएं व जनसाधारण को आने वाली असुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वर्ष-2006 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर कोर्ट ने वर्ष-2009 में पब्लिक प्लेस, पार्क, रोड पर बने अवैध धार्मिक स्थलों को हटवाने के आदेश जारी किए। इसको संज्ञान में लते हुए प्रदेश सरकार की ओर से 22 जनवरी 2010 को पॉलिसी बनाकर सड़कों किनारे बने अवैध धार्मिक निर्माणों को ढहाने के आदेश पारित किए गए। इसके बाद कमानी चौक पर बने मंदिर को गिराया गया, किंतु चौक के चारों ओर मौजूदा समय में अतिक्रमण अभी भी बरकरार है। चौक के इर्द-गिर्द ट्रैफिक बूथ सहित फड़ियां व रेहडिय़ों के अलावा ऑटो-रिक्शा व अन्य वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े रहते हैं। जबकि चौक के एक तरफ बस स्टैंड से कमानी चौक के बीच और दूसरी ओर आईटीआई मार्ग पर दुकानदारों के अतिक्रमण व बैंकों की अवैध पार्किंग से दिनभर जाम की दिक्कत बनी रहती है।
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इन बिंदुओं पर अमल से हो सकेगा कुछ सुधार:-
- 66 केवीए हाईटेंशन तार के टावर हटाकर व तारों को अंडरग्राउंड कर उनके स्थान पर स्लिप-वे बनें।
-चौक किनारे से ट्रैफिक बूथ को हटाकर थोड़ी दूरी पर ले जाकर उसके स्थान पर भी स्लिप-वे बनें।
-चौक के ईर्द-गिर्द लगी फड़ियों, रेहड़ियों सहित बेतरहीब ढंग से खड़े वाहन हटें।
- चौक से आईटीआई मार्ग पर तीन बैंक है, जिनके आगे अवैध पार्किंग से सड़क जाम रहती है, यह समस्या दूर हो।
- आईटीआई सहित चौक से बस स्टैंड को जाते मार्ग पर दुकानदारों द्वारा किए अवैध अतिक्रमण हटें।
- चौक पर जेब्राक्रॉसिंग, कैटआई, रेट्रो रिफ्लेक्टर वाले पूर्व सूचक व संकेतक बोर्ड जैसे ट्रैफिक डिवाइस हों।
- चौक पर हादसों के ग्राफ के मद्देनजर चालकों को सचेत करने को कुछ दूरी पहले खतरे का बोर्ड लगें।
वर्जन
चौक के पास से हाईटेंशन तार के टावर हटाने की प्रक्रिया के लिए नेशनल हाईवे से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वह रिमांडर दोबारा विभाग को पत्र लिखेंगे। जैसे ही एनएच द्वारा निर्धारित लागत राशि जारी होगी, निगम द्वारा यह कार्य पूरा कर दिया जाएगा।
जेएस सरवारा, एसईएन, हरियाणा बिजली प्रसारण निगम।