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अपने धर्म में आस्था रखकर धर्मानुसार बनाएं आचरण : दिनेश मुनि

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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे प्रवचन में दिनेश मुनि ने न्यूज शब्द में डब्ल्यू का अर्थ समझाया। इसका अर्थ होता है वरशिप अर्थात पूजा। उन्होंने कहा या तो व्यक्ति को अपने धर्म में आस्था रखकर धर्मानुसार आचरण बना लेना चाहिए। जैसे हमारा जैन धर्म अहिंसा का उपदेश देता है उसी प्रकार से अहिंसा के पथ पर जीवों को कष्ट दिए बगैर साधना के मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए और अपने गुरुओं में श्रद्धा रखनी चाहिए। गुरु महाराज का जीवन में आगमन जीवन और हृदय के परिवर्तन के लिए होता है। उन पर श्रद्धा और आस्था रखकर यदि हम अपने आचरण का परिवर्तन कर लें तो समझो हमारा जीवन सफल हो जाएगा।
उन्होंने श्रावकों को मकर संक्रांति के अवसर पर मकर संक्रांति का पाठ सुनने की सद्प्रेरणा दी। धर्म में आस्था जागृत करने के लिए एक प्रेरक प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जब पंजाब हिंसा ग्रस्त था तब आतंकवाद के दौर में एक बस से 19 नवयुवकों का अपहरण कर लिया गया। उनमें से एक युवक धर्म में अटूट आस्था रखता था। अपहरण की खबर पता लगते ही उसके परिवार वाले परेशान हुए और गुरु महाराज की शरण में पहुंच गए। गुरु महाराज ने भी अंतर ध्यान होकर कहा कि मेरे हिसाब से उस व्यक्ति की मृत्यु नहीं होगी।
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कुछ ही समय बाद खबर आई कि आतंकवादियों ने उन सभी व्यक्तियों को मौत के घाट उतार दिया है। उनका परिवार विलाप करता हुआ गुरु की शरण में आया गुरु महाराज ने फिर कहा कि मेरे हिसाब से उसकी मृत्यु नहीं होनी चाहिए थी। तभी खबर आई कि उनमें से एक युवक बचा है और वह वही वह है जिसके बारे में गुरु महाराज ने कहा था कि इसकी जान नहीं जाएगी। जब उस युवक से पूछा गया तो वह बोला कि जब मैंने मृत्यु सामने देखी तो नवकार मंत्र का पाठ करना शुरू कर दिया। उसी के पुण्य प्रताप से वह बच गया।
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विनीत मुनि ने गरीबी पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस घर में पुश्तैनी पैसा बहुत सारा हो और वर्तमान पीढ़ी का व्यक्ति कोई भी पुरुषार्थ न कर रहा हो, उस घर में गरीबी आने के लक्षण शुरू हो जाते हैं। जिस घर में आपस में प्यार न हो, वैर वैमनस्य हो उसमें भी गरीबी के लक्षण शुरू हो जाते हैं। जिस घर में पैसा बहुत हो परंतु व्यक्ति व्यसनों में पड़ जाए, जुआ, मांस, मदिरा का सेवन शुरू कर दे उस घर में भी गरीबी के लक्षण शुरू हो जाते हैं। जहां पर दान न दिया जाता हो अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान के रूप में न निकाला जाता हो वहां पर भी गरीबी के लक्षण शुरू हो जाते हैं।
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