संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दीनबंधु थर्मल प्लांट के अंदर नई 800 मेगावाट यूनिट के शुरू होने से यमुनानगर से एक साथ 1400 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। नई यूनिट से मार्च 2029 में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। ऐसे में 48 महीने बाद हरियाणा बिजली क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगा।
अभी तक हरियाणा में वर्तमान में हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की वर्तमान क्षमता 2582 मेगावाट है। वर्ष 1998 में इसकी क्षमता 863 मेगावाट थी। थर्मल की नई 800 मेगावाट यूनिट शुरू होने पर 3382 मेगावाट बिजली उत्पादन हो जाएगा। इसके अलावा हिसार के खेदड़ में एक और पानीपत में दो अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल प्लांट लगाने की हरियाणा सरकार की योजना है।
राज्य के ऊर्जा मंत्री अनिल विज को दो दिन पहले यमुनानगर आकर इसकी पुष्टि कर चुके हैं। हरियाणा में सबसे अधिक बिजली उत्पादन करने वाले जिलों में से एक झज्जर है, जहां झज्जर पावर लिमिटेड (जेपीएल) का 1320 मेगावाट का सुपरक्रिटिकल कोयला आधारित बिजली संयंत्र स्थित है।
यह संयंत्र अपना 90 प्रतिशत उत्पादन हरियाणा राज्य को और शेष क्षमता टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड को प्रदान करता है। वहीं बात करें तो हरियाणा में अन्य बिजली संयंत्रों में पानीपत थर्मल प्लांट 700, राजीव गांधी थर्मल प्लांट खेदड़ 1200 और यमुनानगर दीनबंधु छोटूराम थर्मल प्लांट 600 मेगावाट के प्लांट लगे हुए हैं।
हरियाणा में पानीपत, यमुनानगर, खेदड़, फरीदाबाद तथा इंदिरा गांधी पावर स्टेशन के बिजली संयंत्र हैं, जहां से बिजली उत्पादन हो रहा है। यमुनानगर में 800 मेगावाट यूनिट की नई यूनिट लगने से बिजली उत्पादन में विस्तार तो होगा, साथ ही जिले को 24 घंटे बिजली मिलेगी, इसके साथ-साथ हरियाणा के उद्योगों भी इसका लाभ मिलेगा। वहीं यूनिट लगने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे।