यमुनानगर। हरियाणा रोडवेज के यमुनानगर डिपो पर मुख्यालय से शनिवार को एक और यूरो-6 बस भेजी गई। इससे पूर्व चार यूरो-6 बसें 30 सितंबर व एक यूरो-6 बस 30 नवंबर को आई। इस तरह ढाई माह में छह 54 सीटर यूरो-6 बसें डिपो पर आईं लेकिन इस बीच 10 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी 52 सीटर 10 बसें कंडम भी घोषित कर दी गईं। इससे डिपो पर बसों की कुल संख्या 133 रह गई, जो मांग से आधी है।
इसी तरह एक दशक से 275 बसों की क्षमता वाले डिपो पर नई बसों के आने के बाद भी बसों की संख्या घटती रही, वहीं वर्ष-2018 में कैल-कलानौर बाईपास चालू होने से दूसरे राज्यों की सर्विस भी छिन गई, क्योंकि इन राज्यों की बसें शहर के बजाय बाईपास से निकल रही हैं। इसका खामियाजा जिले के लोग भुगत रहे हैं। यात्रियों देर शाम शहर से बाहर जाने व कहीं बाहर से वापस लौटने को बसें नहीं मिल रही हैं।
बाईपास बनने से सिटी से कटी दूसरे राज्यों की बसों की सर्विस
कैल-कलानौर बाईपास चालू होने से पहले पंजाब, हिमाचल, यूपी, उत्तराखंड रोडवेज की यूपी के सहारनपुर व हरियाणा के अंबाला और कुरुक्षेत्र आने-जाने वाली बसें शहर से निकलती थी। इनमें सहारनपुर व अंबाला रूट की बसें जगाधरी व यमुनानगर बस स्टैंड से या उनके बाहर से होकर आती-जाती थीं। इस तरह दूसरे राज्यों की बसों के शहर के बीच से एक दिन में औसत सौ फेरे थे, पर कैल-कलानौर बाईपास चालू होते ही दूसरे राज्यों की बसों की यह सर्विस शहर से कट गई।
लांग व ग्रामीण रूट पड़े बंद, चालू रूटों पर भी फेरे कम
जिले की आबादी बढ़कर 15 लाख से अधिक हो चुकी है, पर परिवहन के मामले में हरियाणा रोडवेज की बसें बढ़ने के बजाय घटी है। छह वर्ष पहले यमुनानगर डिपो पर बसों की संख्या 175 थी, जो अब घटकर 133 रह गई है। क्योंकि इस बीच कई नई बसें भी आईं, लेकिन साथ ही कई पुरानी बसें कंडम भी होती गईं। बसों की कमी में राजस्थान, पंजाब, जम्मू के लिए कोई बस नहीं है जबकि पहले इन राज्यों के रूटों पर बसें थीं। ये रूट एक अर्से से बंद हैं, वहीं हिमाचल में चार, उत्तराखंड में दो, यूपी में तीन ही रूटों पर सर्विस हैं। हरियाणा के कई जिलों सहित काफी ग्रामीण भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। चालू रूटों पर भी बसों के फेरे कम हैं।
दूसरे राज्यों की बसें थी सहारा, शहर को मिले सर्विस
चिराग सिंघल ने कहा कि यमुनानगर डिपो पर हरियाणा रोडवेज की बसों की संख्या कई वर्षों से जरूरत से कम हैं। इस परेशानी में दूसरे राज्यों की बसें सहारा बनती थी, उनकी भी बाईपास बनने के बाद से शहर से सर्विस कट गई। ऐसे में शहर से बाहर जाने या कहीं बाहर से वापस लौटने पर बसें नहीं मिलती हैं, इसलिए दूसरे राज्यों की बसें शहर से निकाली जानी चाहिए।
वापसी में दूसरे राज्यों की बसों में नहीं मिलती जगह
वीरेंद्र सपरा ने कहा कि चंडीगढ़, अंबाला से शहर वापसी में पहले हरियाणा रोडवेज की बस न मिलने पर दूसरे राज्यों की बसों से आ जाते थे, पर अब ऐसा नहीं है। कैल-कलानौर बाईपास बनने से दूसरे राज्यों की बसें जगाधरी व यमुनानगर नहीं आतीं। उनमें यमुनानगर व जगाधरी के लोगों को बैठाने से इंकार कर दिया जाता है या उन्हें कैल बाईपास छोड़ दिया जाता है। जहां से अन्य साधन तलाशने में दिक्कतों से दो चार होना पड़ता हैं।
वर्जन
यह सही है कि कैल-कलानौर बाईपास बनने से दूसरे राज्यों की बसें शहर के बजाय बाहर से निकल रही हैं। इससे देखते हुए खासकर अंबाला व चंडीगढ़ रूट के यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए दोनों रूटों पर हरियाणा रोडवेज बसों के फेरे बढ़ाए हैं।
बालकराम, रोडवेज महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो।