शहर में पार्कों की हालात में सुधार के लिए उन्हें आरडब्ल्यूए (रेजिडेंड वेलफेयर एसोसिएशन) को सौंपने से काम नहीं चलेगा बल्कि नगर निगम को हर पार्क पर दो लोगों का स्टाफ भी देना चाहिए। इसमें पौधों की देखरेख को एक माली व रंग-रोगन से लेकर सफाई व अन्य मरम्मत कार्यों के लिए एक कर्मी नियुक्त हो। यह सुझाव अमर उजाला के जनमंच कार्यक्रम में लोगों की ओर से आया है। उनका कहना है कि नगर निगम पार्कों को आरडब्ल्यूए व अन्य संस्थाओं और संगठनों को सौंपकर पल्ला झाड़ देता है, पर उन्हें देखरेख की एवज में प्रतिमाह पांच रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मिल रहा खर्च नाममात्र है। यही वजह है कि पार्कों के हालात नहीं सुधर पा रहे हैं। बता दें कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में कुल 94 पार्क हैं, जिनमें 44 पार्क आरडब्ल्यूए व अन्य संस्थाओं व संगठनों के पास हैं। इन 44 पार्कों की स्थिति फिर भी कुछ ठीक हैं, पर नगर निगम के अधीन अन्य 50 पार्कों में ज्यादातर के हालात बिगड़े हुए हैं।
रविपाल ने कहा कि आरडब्ल्यू व अन्य संस्थाओं व संगठनों के अधीन पार्कों को छोड़ अन्य पार्कों ऐसे हैं, जहां सैर के लिए फुटपाथ, पीने को पानी व शाम बाद रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट, बच्चों के झूले व बड़ों की ओपनजिम की दरकार है। साथ ही सफाई न होने से गंदगी व ऊंची घास व झाड़ लगी हैं। ऐसे पार्कों में लोग चाहकर भी नहीं जाते, क्योंकि कई पार्कों में जहरीले जीव होने के साथ गंदगी में बीमारी का डर है। अगर सही में पार्कों का सुंदरीकरण करना है तो हर पार्क पर निगम स्टाफ होना चाहिए।
कमल ने कहा कि नगर निगम का जोर केवल पार्कों को आरडब्ल्यूए व अन्य संस्थाओं और संगठनों को सौंपने पर है, पर केवल इससे काम चलने वाला नहीं है। क्योंकि पार्कों की देखरेख के बदले संस्थाओं व संगठनों को मिलने वाला खर्च नाममात्र हैं। ऐसे में निगम की ओर से हर पार्क पर एक-एक माली व सहायक नियुक्त किया जाना चाहिए। जिससे पार्कों में पेड़-पौधों की देखरेख और रंग-रोगन से लेकर सफाई व अन्य मरम्मत कार्य आसानी से हो सकें।
सुंदू सांगवान ने कहा कि हर कॉलोनी में कम से कम एक पार्क होना जरूरी है। कई जगह ऐसा है, पर वहां अधिकांश पार्कों की देखरेख की व्यवस्था नहीं है। शहर के वार्ड-8 व 9 के पार्कों के सुंदरीकरण पर ही निगम अफसरों का अधिक फोकस रहता है जबकि अन्य वार्डों के पार्कों के हालात में सुधार पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही कारण है कि वहां पार्कों में सुविधाएं मिलनी तो दूर सफाई तक नहीं हो पाती है। ज्यादातर पार्क तो ऐसे हैं, जिनके नामों के बोर्ड हीं नहीं है या उनके नाम ही नहीं रखे जा सके हैं।
मनोज लोहट ने कहा कि वार्ड-11 में बना डॉ. बीआर आंबेडकर पार्क में सफाई, स्ट्रीट लाइट की सुविधा नहीं है। इसके लिए निगम अफसरों से मांग कर चुके हैं। किंतु मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्क के मौजूदा हालात ये हैं कि चारों ओर ऊंची घास व झाड़ लग चुके हैं और यहां लगी ओपनजिम की मशीनों के उपकरण टूट रहे हैं। पार्क की यह स्थिति नगर निगम की ओर से देखरेख न किए जाने के कारण है।