संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी मीना भारती ने श्रद्धालुओं को साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक भक्ति का आरंभ जीवन में गुरु के पदार्पण से होता है।
गुरु के प्रति समर्पण, विश्वास, अनुशासन और उनकी आज्ञा के अनुरूप जीवन जीना ही सच्चे शिष्य की पहचान है। सच्चा शिष्य गुरु के वचनों को केवल सुनता नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में धारण भी करता है। गुरु शिष्य के भीतर छिपी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु आज्ञा का पालन शिष्य की श्रद्धा और समर्पण की वास्तविक परीक्षा है। जीवन में कई परिस्थितियां ऐसी आती हैं, जब व्यक्ति अपनी बुद्धि, सुविधा और इच्छाओं के अनुसार निर्णय लेना चाहता है। ऐसे समय में शिष्य धर्म अपने अहंकार और स्वार्थ से ऊपर उठकर गुरु के मार्गदर्शन पर विश्वास करना सिखाता है।
साध्वी ने कहा कि केवल गुरु के प्रति भावनात्मक लगाव पर्याप्त नहीं है। गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर निरंतर चलना ही वास्तविक गुरु भक्ति है। जब शिष्य अपने प्रत्येक कर्म को गुरु की शिक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास करता है तो उसके भीतर विनम्रता, धैर्य, करुणा और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित होते हैं। सच्चे गुरु ही अपने शिष्य को भवसागर से पार लगाते हैं।