व्यासपुर। अहड़वाला के राजकीय महाविद्यालय में एक दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसका विषय सिख गुरु परंपरा : हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत रहा। मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री पहुंचे। विशिष्ट अतिथियों में मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र सिंह बढ़खालसा तथा हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग शामिल रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। धर्मो रक्षति रक्षितः का संदेश आज भी मार्गदर्शक है। विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र सिंह बढ़खालसा ने गुरु तेग बहादुर जी को पूरे हिंदुस्तान का गुरु बताते हुए युवाओं से संस्कृति और भाषा से जुड़ने का आह्वान किया। मुकेश गर्ग ने कहा कि गुरु समाज को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है और गुरु तेग बहादुर जी मानवाधिकारों के प्रथम रक्षक थे।
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प्राचार्या डॉ. सर्वजीत कौर ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान मानवीय मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का अनुपम उदाहरण है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उपप्राचार्य एवं सेमिनार संयोजक डॉ. रमेश धारीवाल ने सेमिनार के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए संत-गुरु परंपरा की सांस्कृतिक भूमिका रेखांकित की।
समापन सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ले. डॉ. वीरेंद्र पाल सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने विचार साझा किए। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। मंच संचालन आरती अरोड़ा व डॉ. मनीषा ने किया। कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।