संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। मां दुर्गा की नौ महाशक्तियों की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्रि वीरवार से शुरू हो रहे हैं। गुप्त नवरात्रि 26 जून से चार जुलाई तक चलेंगे। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की उपासना की जाएगी। मान्यता है कि इन महाशक्तियों की उपासना करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति है।
तंत्र-मंत्र सहित गुप्त विद्याओं की प्राप्ति के लिए मां के इन नौ रूपों की पूजन की मान्यता है। इसे लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नवरात्रि के दौरान तड़के चार से पांच बजे तक मंदिरों में गुप्त पूजन किया जाएगा। बता दें कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित प्राचीन श्रीमूर्ति देवी मंदिर में मां दुर्गा की इन दस महाविद्याओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। जिनका नित पूजन किया जाता है।
पंडित रमन वत्स ने बताया भारतीय परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। यही कारण है कि वर्ष में चार बार शक्ति की उपासना का पर्व मनाया जाता है। हिंदी नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह में शक्ति उपासना के साथ होती है। इसके बाद आषाढ़ के माह में गुप्त नवरात्रि होते हैं। जबकि अश्विन माह में शारदीय नवरात्र आते हैं।
इसके बाद माघ के महीने दोबारा गुप्त नवरात्र आते हैं। उन्होंने बताया कि इस नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इन दिनों में मां काली, तारा देवी, मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।
पंडित मेहश शांडिल्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि वीरवार को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होंगे। जिनका समापन चार जुलाई को होगा। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्रि पर बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। जिसमें किए सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। प्रतिपदा पर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। इस योग में किए कार्यों में सफलता मिलती है।
यह योग वीरवार सुबह आठ बजकर 46 मिनट पर आरंभ होगा और शुक्रवार प्रात: पांच बजकर 31 मिनट तक रहेगा। उन्हाेंने बताया कि गुप्त नवरात्रि पूजन के लिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह नौ बजकर नौ मिनट पर शुरू होगा। इस दौरान 11 बजकर 34 मिनट तक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है। इसके बार सुबह 11 बजकर 34 मिनट से दोपहर एक बजकर 24 मिनट तक का समय घट स्थापना के लिए शुभ रहेगा।
ऐसे करें पूजन
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रि पूजन में पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इन दिनों साधक को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले नवरात्रि पर भूमि पर गंगा जल छिड़क कर शुद्धि करें। इसके बाद मां की चौकी स्थापित करें। एक घट में गंगा जल या गंगाजल मिश्रित जल भरें। घट के मुख पर कलावा बांधे। इसके साथ आम के पत्ते रखें। एक हरा नारियल लें और लाल चुनरी में लपेट कर उस पर कलावा बांधे और घट पर स्थापित करें। वहीं, मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। रोजाना इस पर जल का छिड़काव करें। प्रति दिन मां की प्रतिमा की स्थापना कर पूजन करें। पूजन के लिए मां की प्रतिमा व चित्र के सम्मुख धूप, दीपक, कपूर प्रज्ज्वलित करें। फल, फूल, मिष्ठान व वस्त्र इत्यादि अर्पित करें। हर दिन मां दुर्गा के रूप से संबंधित मंत्र का जाप करें। परंपरागत अष्टमी या नवमी पर अपने व्रत का पारण करें। इसके लिए नौ कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनका पूजन करें। हलवा, पूरी, चना का प्रसाद दें और उन्हें घर भोजन करवाएं। नवरात्रि समापन पर कलश व जौ का विसर्जन करें।