आषाढ़ शुक्ल पक्ष के गुप्त नवरात्र सोमवार 19 जून से शुरू होने जा रहे हैं और 28 जून तक मनाए जाएंगे। यह नवरात्र साल में चार बार मनाए जाते हैं। दो सार्वजनिक रूप से ओर दो बार गुप्त रूप से। आषाढ़ शुक्ल पक्ष और माघ शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्र मनाए जाते हैं जबकि चैत्र और अश्विन में ये सार्वजनिक होते हैं। गुप्त नवरात्रों में 10 गुप्त स्वरूप में पूजा की जाती है।
पहले दिन सोमवार को घट स्थापना होगी। इसके लिए सुबह 11.55 से 12.50 बजे (अवधि 56 मिनट) तक अभिजित मुहूर्त हैं, वहीं ज्योतिषाचार्य की मानें तो सुबह 5.23 से 7.27 बजे (अवधि दो घंटे चार मिनट) के बीच भी घट स्थापना की जा सकती है। उनका कहना है कि यह नवरात्र गुप्त सिद्धियां पाने को शुभ हैं, जिसमें दस महाविद्याओं की पूजा होती है।
शिव शक्ति कर्मकांड संस्थान से ज्योतिषाचार्य महेश शांडिल्य ने बताया कि साल में चार नवरात्रि में दो सामान्य व दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। इनमें गुप्त नवरात्र एक माघ और दूसरे आषाढ़ माह में आते हैं। आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र की शुरुआत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। वैसे तो प्रतिपदा तिथि 18 जून सुबह 10 बजकर छह मिनट पर शुरू होगी, किंतु पंचांग मुताबिक आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि 19 जून से शुरू होंगे, क्योंकि प्रतिपदा तिथि अगले दिन 19 जून को सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन से शुरू होकर गुप्त नवरात्रि की 28 जून को समाप्त होगी।
महेश शांडिल्य ने कहा कि गुप्त नवरात्र में गुप्त तरीके से पूजा का विधान है। इन नवरात्रि को गुप्त सिद्धियों के लिए शुभ माना गया है। इनमें जिन 10 महाविद्याओं की पूजा का विधान है, उनमें मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
मान्यता है कि इसी गुप्त नवरात्रि की पूजा के बल पर विश्वामित्र को असीम शक्ति प्राप्त हुई थी और इसी महापर्व पर साधना कर रावण के पुत्र मेघनाद ने इंद्र को हराया था। हिंदू मान्यता अनुसार कोई साधक गुप्त नवरात्र में एक निश्चित समय पर गुप्त रूप से देवी दुर्गा के पावन स्वरूप की साधना करता है तो उसे उनसे सुख-सौभाग्य और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। शत्रु, ग्रह बाधा और तमाम दुख उससे दूर रहते हैं।
नवरात्र के पहले दिन ब्रह्म बेला में मां दुर्गा को प्रणाम करें। घर की साफ-सफाई और नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। लाल रंग का नवीन वस्त्र धारण कर ओम पवित्राय नमः मंत्र का उच्चारण कर आचमन करें। इसके बाद व्रत संकल्प लें। अब मां का आह्वान या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता मंत्र से करें। इसका अर्थ है कि हे नारायणी, जगत जननी, मां अन्नपूर्णा आपको मेरा दंडवत प्रणाम। हे मां, मुझे सद्बुद्धि दें, सदमार्ग पर चलने की शक्ति दें। अपनी कृपा से मेरा जीवन धन्य करें।
इसके बाद मां दुर्गा की पूजा फल, फूल, लाल पुष्प, दूर्वा, धूप और दीप से करें। पूजा के समय दुर्गा चालीसा और दुर्गा स्तुति पाठ करें। अंत में आरती-अर्चना करें। दिनभर उपवास रखें। चाहे तो दिन में एक बार फलाहार कर सकते हैं या शाम में आरती कर फलाहार करें। मान्यता है कि ऐसा पूरी नवरात्रि करने से सुख-समृद्धि मिलती है।