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नाबालिग से दुराचार के दोषी को सात साल कैद

Wed, 22 Jan 2014 12:13 AM IST
यमुनानगर
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नाबालिग छात्रा का अपहरण करने के बाद उससे दुराचार के दोषी को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल दो महीने तक चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। जानकारी के अनुसार 21 सितंबर 2012 को एक व्यक्ति ने फरकपुर पुलिस को शिकायत दी थी कि वह जगाधरी वर्कशॉप में नौकरी करता है।

उसकी बेटी शहर के एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ती है। 21 सितंबर को सुबह साढे़ 5 बजे वह उठा। इसके बाद उसने बेटी को उठा दिया, ताकि वह अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके। इसके बाद वह पत्नी के साथ अपने पिता की भैंसों की डेयरी पर चला गया।
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करीब आधे घंटे के बाद जब उसकी पत्नी वापिस घर पहुंची, तो उसे घर से बेटी गायब मिली। इसकी सूचना उसने उसे दी। जांच के दौरान पता चला कि रायपुर कॉलोनी थाना सदर यमुनानगर निवासी शुभम उसकी बेटी को शादी का झांसा देकर अपहरण करके ले गया। उसकी बेटी को भगाने में पड़ोसी, उसके लड़के तथा पत्नी ने मदद की। पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर शुभम तथा उसके पड़ोसियों के खिलाफ भादंसं की धारा 363, 366ए तथा 120 बी के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। 30 सितंबर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान शुभम ने बताया कि 21 नवंबर को वह बाइक पर लड़की को साथ ले गया था।

 बाइक उसके रिश्तेदार की थी। इसको पुलिस ने बरामद कर लिया। दो अक्टूबर को जब पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, तो उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस जांच के दौरान पीड़िता के पड़ोसियों की इस मामले में संलिप्तता नहीं पाई गई। इस कारण इस मामले में से 120बी को हटा दिया गया।
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30 नवंबर 2012 से मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट में एक साल दो महीने तक चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों ने गवाही दी। दोनों पक्षोें की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने भादंसं की धारा 376 तथा 366 में सात साल की कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है, जबकि भादंसं की धारा 363 में पांच साल की कैद तथा एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
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