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न बैठने के लिए सुविधा, न रिफ्रेशमेंट का बंदोबस्त

Wed, 22 Jan 2014 12:07 AM IST
यमुनानगर
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कड़ाके की ठंड के बीच तेजली स्टेडियम में मंगलवार को विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों बच्चों ने रिहर्सल की। गणतंत्र दिवस समारोह के अभ्यास के दौरान विद्यार्थियों ने शीत लहर और कंपकंपा देने वाली सर्दी में गीली घास पर अपने इवेंट की प्रैक्टिस की।
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ठंड से बचने का जब कोई चारा हाथ नहीं लगा तो कुछ छात्राएं लहंगे और चुन्नी में ही लिपट कर बैठी रहीं, ताकि किसी तरह इस शीतलहर से बचा जा सके। स्टेडियम में अपने इवेंट के अभ्यास की बारी आने के लिए बच्चों को घंटों ओस से सनी घास पर ही बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ प्राइवेट स्कूलों की ओर से जहां दरी और कुर्सियों का खुद इंतजाम किया था। लेकिन गवर्नमेंट स्कूलों के विद्यार्थियों और टीचरों को लचर व्यवस्थाओं से जूझना पड़ा।

रिफ्रेशमेंट भी नहीं
एक तो ठंड और दूसरा रिफ्रेशमेंट न मिलने से बच्चों को दिक्कत और बढ़ गई। सुबह नाश्ता कर आए बच्चे दोपहर बाद तक अभ्यास करते रहे।  रिहर्सल में हिस्सा लेने वालों के लिए प्रशासन की ओर से सिर्फ पानी का ही इंतजाम दिखा। वह भी इतना ठंडा कि उसे पीना तो दूर हाथ भी लगाया न जा सके। रिहर्सल में भाग लेने आई छात्रा मोनिका, शीतल और सुमन का कहना था कि रिहर्सल के नाम पर उन्हें भूखा रखा जा रहा है। न तो पीने के लिए चाय का ही इंतजाम है कि इतनी सर्दी में चाय पीकर ही सर्दी के असर को कम किया जा सके और न ही रिफ्रेशमेंट की सुविधा है। उनका कहना है कि जो पानी का टैंक खड़ा किया गया है उसका पानी इतना ठंडा है कि लगता है कई दिनों से भरकर खड़ा किया गया हो।
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अभ्यास करने में होती है असुविधा 
स्कूली बच्चों के साथ पहुंची टीचरों का कहना था कि असुविधाओं के बीच बच्चों को प्रैक्टिस करनी पड़ रही है। ऐसे में कैसे बच्चे बेस्ट परफॉर्मेंस दें पाएंगे। बच्चे सुबह से दोपहर तक ठंड से ठिठुरते रहते हैं और जब अभ्यास करने की बारी आती है तो बच्चे खुलकर अभ्यास नहीं कर पाते। इससे अच्छा तो बच्चों को स्कूलों में ही अभ्यास कराया जाता और अंतिम दो दिन की रिहर्सल ही यहां पर कराई जाती। उन्होंने कहा कि कम से कम बच्चों के बैठने और रिफ्रेेशमेंट के लिए तो प्रशासन को इंतजाम करने चाहिए। प्रशासन को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की लगी है। लेकिन बच्चों को सुविधाएं देने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि जब स्टेज पर बैठे अधिकारियों के लिए कुर्सियां आ सकती हैं तो टीचर और बच्चों के बैठने की सुविधा क्यों नहीं हो सकती।
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