जगाधरी नौवीं कक्षा की छात्रा का अपहरण करने के बाद दुराचार के दोषी गांव हजरतपुर जिला बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) निवासी दुर्गा प्रसाद को कोर्ट ने 12 साल कैद तथा 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है।
कोर्ट में करीब एक साल तक मामले की सुनवाई चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वीरवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायधीश ने दोषी को सजा सुना दी।
जानकारी के अनुसार 23 अप्रैल 2013 को बिहार के गांव सिगवाड़ा निवासी एक व्यक्ति ने सिटी पुलिस जगाधरी को दी शिकायत में कहा कि वह शहर की एक मैटल फैक्टरी में काम करता है तथा फैक्टरी में बने क्वाटर में परिवार के साथ रह रहा है।
उसके पास तीन लड़के तथा दो लड़कियां है। उसकी बड़ी बेटी झंडा चौक के पास स्थित सरकारी स्कूल में नौवीं में पढ़ती है। 14-15 दिन पहले वह घर से रोजमर्रा की तरह स्कूल गई थी लेकिन नहीं लौटी।
पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर भादंसं की धारा 363 तथा 366 ए के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
तफ्तीश के दौरान पुलिस को पता चला कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गांव हजरतपुर निवासी दुर्गा प्रसाद ने छात्रा का अपहरण किया है।
जो कि जगाधरी में ही किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस ने दुर्गा प्रसाद को काबू कर जब उससे पूछताछ की तो उसने गुनाह कबूल कर लिया।
21 मई 2013 को पुलिस ने छात्रा को रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने छात्रा के साथ दुराचार किया है।
जिसके बाद पुलिस ने मामले में दुराचार की धारा 376 को जोड़ दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायधीश रितु गर्ग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दुर्गा प्रसाद को दोषी करार दिया।
सरकारी वकील रजनीश रायजादा ने बताया कि कोर्ट ने दुर्गा प्रसाद को 12 साल कैद तथा 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।