संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जीएसटी की दरों में कमी आने के बाद भी दुकानदार ग्राहकों को इसका लाभ देने से बच रहे हैं। दुकानदारों का एक ही तर्क है कि उनके पास पुराना स्टॉक पड़ा है। यदि कीमतें घटा कर लोगों को सामान देने लगे तो उन्हें नुकसान हो जाएगा। ऐसे में एमआरपी पर ही सामान बेचा जा रहा है।
पहले तो एमआरपी पर एक-दो रुपया कम हो भी जाता था, लेकिन अब तो जितना रेट खाने के सामान पर लिखा है, उसी दर से लोगों को बेचा जा रहा है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि जीएसटी दर कम हुई है या फिर बढ़ गई हैं। वहीं अभी तक लोगों को यह भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन सा सामान सस्ता हुआ है।
जीएसटी की घटी दरों का लोगों को फायदा मिल रहा है या नहीं, यह जानने के लिए शहर के मॉडल टाउन में स्थित एक प्रतिष्ठित बेकरी पर नमकीन, बिस्कुट, पानी की बोतल व कोल्डड्रिंक खरीदी गई। बिस्कुट के एक पैकेट पर 25 रुपये, दूसरे पर 30 रुपये, कोल्ड ड्रिंक पर 30 रुपये और नमकीन के पैकेट पर 62 रुपये सभी कर सहित लिखा हुआ था।
दुकानदार ने किसी भी सामान में एक रुपया भी कम नहीं किया। जो एमआरपी पैकेट पर लिख था, उसी रेट पर दिया। इस पर दुकानदार से जब यह कहा गया कि अब तो सामान पर जीएसटी घट कर मात्र पांच प्रतिशत रह गई है तो दुकानदार का तर्क सुन कर हम भी हैरान रह गए। दुकानदार ने कहा, जीएसटी की घटी दर अभी लागू कहां हुई है।
जीएसटी को लागू होने में अभी तो कम से कम दो महीने लग जाएंगे। जिन कंपनियों का सामान बेच रहे हैं, वह खरीदने पर बिल नहीं दे रही है। सीधे नगद राशि मांग रही हैं। सामान का पहले से स्टॉक मंगवा रखा है। यदि इसे कम कीमत पर बेचने लगे तो घाटा कौन सहेगा। नमकीन के पैकेट पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घट कर पांच प्रतिशत रह गई है। 62 रुपये का पैकेट खरीदने पर करीब चार रुपये की बचत होनी चाहिए था, लेकिन एक रुपया भी कम नहीं हुआ।
एक अन्य दुकान पर दुकानदार ने पैकड चिप्स, कुरकुरे व अन्य सामान एमआरपी पर ही बेचने की बात कही। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में जो छोटी-छोटी दुकानें खुली हैं वहां पर भी एमआरपी पर ही सामान बेचा जा रहा है। यह दुकानदार थोक विक्रेताओं से सामान खरीदने समय न तो बिल लेते हैं और न ही ग्राहकों को बेचते हुए बिल देते हैं।
ऐसे में इनके द्वारा बेचे गए सामान की कीमतों में भी कोई नहीं है। सरकार का निर्देश है कि 22 सितंबर से जो सामान जीएसटी दर घटने से सस्ता हुआ है, दुकानदारों को उन सामानों को सस्ते दाम पर ही बेचना होगा। यानी कि दुकान में स्टॉक नया हो या फिर पुराना ग्राहक को कटौती का लाभ मिलेगा।
उपभोक्ता यहां कर सकते हैं दुकानदार की शिकायत
अगर दुकानदार पुराने एमआरपी पर ही सामान दे तो टोल फ्री नंबर 1800114000 या 1915 पर कॉल कर शिकायत करें। मोबाइल नंबर 8800001915 पर एसएमएस या व्हाट्सएप पर मैसेज करके भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। एनएसीएच एप पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की साइट www.consumerhelpline.gov.in पर रजिस्टर्ड कराकर शिकायत कर सकते हैं।
जीएसटी की घटी दरें 22 सितंबर से देशभर में लागू हो चुकी हैं। चाहे किसी दुकानदार के पास पहले से ही सामान का स्टॉक क्यों न पड़ा हो वह जीएसटी की नई दर के हिसाब से ही बेचना होगा। कोई भी दुकानदार ग्राहकों को गुमराह न करे। हम टीम भेज कर अपने स्तर पर बिक रहे सामान की जांच कराएंगे। जो गलत रेट पर सामान बेचेगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। - अदितेंद्र सिंह, डीईटीसी (सेल्स एंड टैक्स), यमुनानगर।
नमकीन के पैकेट पर अंकित रेट। संवाद