यमुनानगर। हरियाणा के 22 जिलों में 14 जिलों के 36 ब्लाॅक की कुल 1669 ग्राम पंचायतों में जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक महेंद्रगढ़ जिला सर्वाधिक प्रभावित है। इसके बाद यमुनानगर और कुरुक्षेत्र जिला शामिल है। अटल भूजल योजना के तहत किए जा रहे अथक प्रयासों के बाद भी भूजल लेवल में सुधार नहीं हो पा रहा। लगातार गिर रहा भूजल स्तर भविष्य के लिए खतरे की घंटी है ।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार गिर रहे भूजलस्तर का मुख्य कारण धान (जीरी) व गन्ना की फसल की सिंचाई के लिए पानी की अधिक खपत होना है। आंकड़ों के मुताबिक धान में 1100 मिली मीटर तथा गन्ने की फसल में 2100 मिली मीटर सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है जो काफी अधिक है। यदि किसान धान के लिए डीसीआर विधि का उपयोग करें तो सिंचाई के दौरान पानी की खपत कम होगी। इतना ही नहीं अटल भूजल योजना के तहत भूजल लेवल को स्थिर रखने के लिए किसानों को मुफ्त बाजरे का बीज भी दिया गया ताकि किसान कम से कम धान की खेती करें। इसी तरह ब्लॉकों की पंचायतों में पीजोमीटर लगाए गए। संवाद
साढौरा में स्थिति सबसे खराब
यमुनानगर जिला के ब्लाॅक जगाधरी, रादौर, साढौरा तथा सरस्वती नगर की 251 ग्राम पंचायतों के लिए जल सुरक्षा योजना भी बनाई गई है। खंड साढौरा में जलस्तर की स्थिति सबसे खराब है। यहां जलस्तर 200 से 400 फीट तक पहुंच गया है, जो कि भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। भूजल संकट को लेकर से अटल भूजल योजना चलाई गई है।