यमुनानगर। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत पहली और दूसरी कक्षा को आंगनबाड़ी और एनजीओ को सौंपना चाहती है। ऐसा करने से जन शिक्षा बर्बाद हो जाएगी। इसका हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ पुरजोर विरोध करेगा।
यह बात, संघ के जिला प्रधान संजय कांबोज ने कही। वे पदाधिकारियों और अध्यापकों की बैठक में बोल रहे थे। संजय ने कहा कि सरकार की नई शिक्षा नीति का हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ और स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया विरोध करेगा। जिला सचिव दिनेश तंवर, राज्य सचिव जगपाल सिंह व प्रेस प्रवक्ता राम नरेश ने कहा कि सरकार नई शिक्षा नीति की आड़ में आंगनबाड़ी केंद्रों को एनजीओ को देकर निजीकरण करना चाहती है। इस नई नीति से शिक्षा का अधिकार कानून का कोई औचित्य नहीं रहेगा। सरकार गुणवत्ता का हवाला देकर निजीकरण को बढ़ावा देना चाहती है। लोगों को भ्रम में रखा जा रहा है। कहा कि कौशल विकास के नाम पर छठीं कक्षा से ही बच्चों को व्यवसायों के सपने दिखाए जा रहे हैं। मॉडल स्कूलों के नाम पर दाखिला फीस और मासिक फीस शिक्षा अधिकार कानून का उल्लंघन है। संजय ने कहा कि इसके विरोध में 30 जनवरी को शिक्षामंत्री आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं सरकार की इन नीतियों के खिलाफ अध्यापक जन जागरण अभियान चलाएंगे। जिसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा।
जिला कोषाध्यक्ष प्रतिमा बालियान व पूर्व प्रधान राकेश धनखड़ ने कहा कि सरकार की नीतियों से शिक्षा का सार्वजनिक ढांचा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। छोटे स्कूलों को मजबूत करने की बजाय कम खर्च के नाम पर इन्हें बंद किया जा रहा है। सभी स्कूलों में शिक्षक देने की बजाय 10 से 12 गांव में एक स्कूल में ही शिक्षक देना गलत है।