जिला शिक्षा सदन कार्यालय यमुनानगर। आर्काइव
यमुनानगर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग अब नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। विभाग ने फ्रेंच भाषा को ऐच्छिक विषय के रूप में लागू करने की योजना बनाई है, लेकिन इसका फोकस केवल विषय शुरू करने पर नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रशिक्षण तंत्र विकसित करने पर है। इसी रणनीति के तहत पहले चरण में सीमित संख्या में शिक्षकों को तैयार कर पूरे सिस्टम को विस्तार देने की योजना बनाई गई है। प्रदेश स्तर पर 26 शिक्षकों का चयन किया गया है, जिनमें यमुनानगर से भी एक शिक्षक शामिल है। ये शिक्षक 7 से 10 अप्रैल तक गुरुग्राम स्थित एससीईआरटी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस प्रशिक्षण में भाषा ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक शिक्षण तकनीक, कक्षा प्रबंधन और इंटरएक्टिव तरीके से पढ़ाने के कौशल पर विशेष जोर रहेगा।
शिक्षा विभाग की खास रणनीति यह है कि इन चयनित शिक्षकों को केवल प्रशिक्षित कर छोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें “मॉडल टीचर” के रूप में विकसित करना है। प्रशिक्षण के बाद यही शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह एक शिक्षक कई शिक्षकों को तैयार करेगा और धीरे-धीरे यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में फैल जाएगी। इस पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें अपनी रुचि के अनुसार विदेशी भाषा चुनने का अवसर मिलेगा। फ्रेंच जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषा सीखने से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। खासकर विदेश में पढ़ाई या करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए यह पहल काफी मददगार साबित हो सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। जब शिक्षक आधुनिक तकनीकों और नए विषयों में दक्ष होंगे, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक राणा के अनुसार विभाग का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्थायी और व्यापक ट्रेनिंग सिस्टम तैयार करना है। उन्होंने बताया कि पहले चरण के मॉडल शिक्षक आगे बैच बनाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे फ्रेंच भाषा शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ेगा।