जगाधरी। प्रेमिका की हत्या के दोषी बीना नगर कैंप निवासी धमेंद्र उर्फ बबलू को उम्रकैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 14 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पांच फरवरी 2013 को शहर पुलिस यमुनानगर को टेलीफोन पर सूचना मिली कि न्यू फव्वारा चौक के नजदीक से एंबुलेंस मोनिका की लाश को अस्पताल लेकर आई है। सूचना मिलने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी संदीप कुमार ने पुलिस बल के साथ अस्पताल में पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। शहर पुलिस को दी शिकायत में देवी भवन बाजार सेठानी गली जगाधरी निवासी शिमला देवी ने कहा कि उसके पास छह लड़कियां व दो लड़के हैं। सभी लड़कियों की शादी कर दी है। जबकि छोटी बेटी मोनिका का तलाक हो चुका है। बीना नगर कैंप यमुनानगर निवासी धमेंद्र उर्फ बबलू पुत्र सुरिंद्र कुमार उसकी लड़की मोनिका से शादी करना चाहता था। जबकि धमेंद्र के अभिभावक उनकी शादी कहीं और करना चाहते थे। चार फरवरी 2013 की शाम को धमेंद्र का फोन मोनिका के मोबाइल पर आया। इसके बाद करीब साढे़ सात बजे मोनिका उसे यह कह कर निकल गई कि वह धमेंद्र से मिलने के लिए जा रही है। देर रात तब जब उसकी बेटी घर नहीं आई, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी। उसके दोहते सिद्धार्थ ने धमेंद्र के घर पहुंच कर स्थिति के बारे में पता किया, तो धमेंद्र घर नहीं मिला। बेटी की तलाश में रात को करीब एक बजे वह लक्ष्मी सिनेमा के पीछे पार्क के पास पहुंच गई, जहां पर उसे धर्मेंद्र पार्क से बाहर निकलता मिला। उसे देखकर वह भाग गया।
पांच फरवरी को करीब सात बजे उसे सूचना मिली कि उसकी बेटी यमुनानगर के सिविल अस्पताल में दाखिल है। इसके बाद वह अपने दोहते सिद्धार्थ के साथ अस्पताल पहुंच गई। जहां पर उसे बेटी मोनिका की लाश सिविल अस्पताल में रखी मिली। शिमला देवी ने आरोप लगाया कि धमेंद्र ने अपने माता पिता व भाई के साथ मिलकर बीती रात लक्ष्मी सिनेमा के पीछे बने पार्क में उसकी बेटी का गला दबाकर हत्या की है। पुलिस ने शिमला के बयान पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने पांच फरवरी 2013 को दोषी धमेंद्र को गिरफ्तार किया। छह फरवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 14 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने चार फरवरी को बीना नगर कैंप निवासी धमेंद्र उर्फ बबलू को मोनिका की हत्या का दोषी करार दिया। शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल ने प्रेमिका के हत्यारे धमेंद्र को उम्र कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
दोषी के घर से मिला था मोनिका पर्स व अन्य सामान
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान मृतका मोनिका का बैग, एक जर्सी एक शाल व अन्य सामान प्रेमी धमेंद्र के घर से मिला था। इसके अलावा साइबर सेल से मोनिका व धमेंद्र के फोन की कॉल डिटेल भी निकलवाई गई। पुलिस को जांच के दौरान दोषी धमेंद्र के माता पिता व भाई के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने पर केस से भादंसं की धारा 120 बी को हटा दिया गया।
दुराचार के केस में कोर्ट ने दोषी को किया बरी
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान पता चला था कि मृतका मोनिका करीब चार महीने की गर्भवती थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी धमेंद्र को प्रोटेक्शन वारंट पर लेकर 21 मार्च 2013 को डीएनए टेस्ट करवाया। 30 मार्च को डॉक्टर की राय पर पुलिस ने मामले में दुराचार की धारा 376 को जोड़ दिया। लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव की वजह से कोर्ट ने दुराचार के केस में धमेंद्र को बरी कर दिया।