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टेंडर में लटका कचरा उठान, शहर से देहात तक लोग परेशान

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कचरा उठान के कई टिपर नगर निगम स्टोर में पड़े खराब, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में घरों से इकट्ठा किया जा र? - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। शहर से देहात तक के लोग घरों से कचरा उठान न होने से परेशान हैं। क्योंकि तीन माह से हालात ये हैं कि कॉलोनियों, मोहल्लों व गांवों में कई दिनों व हफ्ते बाद कचरा उठान की गाड़ियां पहुंच रही हैं। ऐसे में घरों में इकट्ठे कचरे से दुर्गंध व मक्खी मच्छर की परेशानी देख लोग खुले में कचरा गिराने पर मजबूर हैं। इन हालात के लिए वार्डों के पार्षद नगर निगम अफसरों को कसूरवार ठहरा रहे हैं।
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उनका आरोप है कि पुराना टेंडर खत्म होने का पता होने के बावजूद अफसरों ने समय पर नया टेंडर नहीं किया। इससे टेंडर खत्म होते ही यह काम नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के जिम्मे आ गया, पर पर्याप्त स्टाफ व संसाधनों की कमी में तीन माह में भी लोगों को नियमित कचरा उठान सेवा नहीं मिल पाई है।
कई जोन की मांग दरकिनार, दो जोन का टेंडर प्लान
मार्च-2022 में नगर निगम ने 25.95 करोड़ रुपये का सिंगल टेंडर किया लेकिन विपक्ष सहित सत्तापक्ष के पार्षदों ने सिंगल टेंडर का विरोध कर दिया। उनकी मांग थी कि कई जोन बनाकर टेंडर किए जाएं। यह प्रस्ताव सदन की विशेष बैठक में पास भी हुआ, पर अप्रैल-2022 को दो जोन में टेंडर करने के प्रस्ताव पर पार्षदों के हस्ताक्षर ले लिए गए। इसके तहत पर जोन-1 में वार्ड-11 से 11 में 12.97 करोड़ व जोन-2 में वार्ड-12 से 22 में 12.97 करोड़ रुपये के टेंडर हो रहे हैं। यानी करीब 26 करोड़ के खर्च में दो जोन बनाकर कचरा उठान कार्य कराने का प्लान है।
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फरवरी-मार्च में ठेका खत्म, तब से टेंडर में लटका काम
वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह, वार्ड-8 से विनोद मरवाह, वार्ड-13 से निर्मल चौहान ने कहा कि पिछले वर्ष 11-11 वार्ड के दो जोन में हुआ कचरा उठान के काम का पुराना ठेका फरवरी-मार्च में खत्म हुआ। इस ठेका अवधि के खत्म होने का पता होने के बाद भी नगर निगम अफसरों ने नए ठेके के लिए समय पर टेंडर प्रक्रिया की तैयारी नहीं की। पुराना ठेका खत्म होने पर सदन की सहमति बिना सिंगल टेंडर किया, जिसे बाद में पार्षदों के विरोध पर रद्द करना पड़ा। अब तक नए टेंडर सिरे न चढ़ने से निगम में लगते शहर से लेकर देहात क्षेत्र में नियमित कचरा उठान नहीं हो रहा, क्योंकि तीन माह से ये काम निगम के जिम्मे हैं, पर इसके लिए निगम के पास न तो पर्याप्त स्टाफ है और न संसाधन। इसी लचर व्यवस्था का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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जल्द टेंडर की प्रक्रिया पूरी होगी। इसमें एजेंसियों को वर्क अलॉट होने पर डोर टू डोर कचरा उठान को लेकर परेशानी नहीं रहेगी।
-सुरेंद्र चोपड़ा, डीएमसी, नगर निगम।
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