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पंडालों में विराजमान होने को तैयार गणपति

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गणपति की मूर्ति को अंतिम रूप देने में लगा मूर्तिकार। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कोरोना की पाबंदियां न होने पर इस बार गणपति उत्सव की बड़े स्तर तैयारियां हो रही हैं। पंडालों की संख्या व उनमें विराजमान होने के लिए तैयार गणपति मूर्तियों के आकार भी बढ़े हैं। अगर ट्विन सिटी (यमुनानगर-जगाधरी) की बात करें तो यहां 160 गणपति पंडाल लगने का अनुमान है। सेक्टर-17 में मूर्तिकारों के पास 160 बड़े आकार की मूर्तियों के यमुनानगर-जगाधरी एरिया के हैं। पांच से 11 फीट ऊंची गणपति की मूर्तियां शहर के गली-मोहल्लों में लगने वाले पंडालों में विराजमान होंगी।
कोरोना संक्रमण के चलते वर्ष-2020 में गणपति उत्सव पर गणपति पंडाल नहीं लग सके थे। वर्ष-2021 में गणपति मूर्तियों व पंडालों की संख्या सीमित रही। गत वर्ष सिटी एरिया में करीब 50 ही पंडाल लगे। मूर्तिकारों के अनुसार पिछली बार उन्होंने शहर में लगने वाले पंडालों के लिए बड़े आकार की 40 मूर्तियां ही तैयार की थीं, जो पांच फीट से लेकर आठ फीट ऊंची थी।
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पंडालों में गणपति मूर्तियां गणेश चतुर्थी पर स्थापित होंगी। गणेश चतुर्थी इस बार 31 अगस्त को है। एक माह पहले पहले से धार्मिक, सामाजिक संगठनों व गली-मोहल्लों के बने युवा क्लब तैयारी में गणपति उत्सव की तैयारी लगे हैं।
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सबसे ऊंची मूर्ति 11 फीट की
मूर्तिकार शंकर व श्रवण ने बताया कि पिछले दो साल कोरोना के कारण गणपति उत्सव पर मूर्तियों के ऑर्डर कम थे। इस बार फिर कोरोना से पहले की तरह ऑर्डर मिले हैं। उनके सहित सेक्टर-17 में रहे रहे मूर्तिकारों ने इस बार करीब दस हजार गणपति की मूर्तियां तैयार की हैं। आधा फीट की मूर्ति 150-200 रुपये की है। सबसे बड़ी मूर्ति 10-11 फीट की है, जो 15-16 हजार रुपये की है। छोटे आकार की मूर्तियां लोग घरों और बड़ी पंडालों में स्थापित करने के लिए ले जाते हैं। यमुनानगर-जगाधरी के लगने वाले पंडालों के लिए 160 मूर्तियां बनाई गई हैं, जो पांच फीट से शुरू होकर सबसे ऊंची 11 फीट की है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों व अंबाला, सहारनपुर, देहरादून से भी लोग उनकी बनाई मूर्तियां लेकर गए हैं।
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