यमुनानगर। साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाते हुए एपीके फाइल और फर्जी लिंक के जरिए लोगों के मोबाइल हैक करने शुरू कर दिए हैं। मोबाइल का एक्सेस मिलते ही ठग यूपीआई और अन्य डिजिटल पेमेंट माध्यमों का इस्तेमाल कर खातों से रकम निकाल रहे हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऐसे ही तीन अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। तीनों घटनाओं में पीड़ितों को कुल 6.41 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
पहला मामला सेक्टर-17 निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला से जुड़ा है। उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का संदेश भेजा गया। संदेश के साथ एपीके फाइल भी भेजी गई थी। महिला ने इसे सरकारी प्रक्रिया समझ कर डाउनलोड कर लिया। कुछ ही देर बाद एक आरोपी ने फोन कर खुद को संबंधित विभाग का कर्मचारी बताते हुए डेबिट कार्ड की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा। महिला ने उसके झांसे में आकर मांगी गई जानकारी भर दी। इसके बाद उनके खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 1.90 लाख रुपये निकाल लिए गए। बैंक से रकम कटने के संदेश मिलने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। दूसरे मामले में चांदपुर निवासी मनोज कुमार के मोबाइल पर एक संदिग्ध लिंक भेजा गया। जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, उनका मोबाइल हैक हो गया। साइबर ठगों ने उनके गूगल पे खाते का इस्तेमाल करते हुए करीब 1.02 लाख रुपये के ऑनलाइन लेनदेन कर दिए। जांच में सामने आया कि निकाली गई राशि का कुछ हिस्सा ऑनलाइन खरीदारी में भी खर्च किया गया।
वहीं तीसरे मामले में सेक्टर-17 निवासी अमरजीत सिंह के मोबाइल पर भी साइबर अपराधियों ने इसी तरह सेंध लगाई। मोबाइल हैक होने के बाद यूपीआई के जरिए दस अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर उनके खाते से 3.49 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने बैंक खाते की जानकारी जांची तो धोखाधड़ी का पता चला। तीनों मामलों की शिकायत मिलने पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस टीम मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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ऐसे काम करती है एपीके फाइल
मोबाइल पर किसी अनजान स्रोत से एपीके (एंड्रायड पैकेज किट) फाइल डाउनलोड करने के लिए भेजा जाता है। साइबर अपराधी नकली बैंकिंग, केवाईसी, इनाम या सरकारी योजना के नाम पर एपीके फाइल भेजते हैं। जैसे ही लोग इसे इंस्टॉल करते हैं और मांगी गई अनुमतियां (एसएमएस, एसेसिबीलिटी, स्क्रीन रिकॉर्डिंग या ओवरले) दे देता है, यह एप फोन पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद यह बैंकिंग एप में दर्ज किए गए यूजर आईडी, पासवर्ड, एमपिन और ओटीपी जैसी जानकारी चुरा लेते हैं या स्क्रीन पर होने वाली गतिविधि को रिकॉर्ड कर लेते हैं। कई बार लोगों को बिना पता चले बैंकिंग लेनदेन भी कर देते हैं, जिससे खाते से पैसे कट जाते हैं। इसलिए किसी भी एपीके फाइल पर बिना जांच के क्लिक नहीं करना चाहिए।