संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कोरोना की रफ्तार धीमी होने के साथ ही जिले में टीकाकरण अभियान को गति दी जा रही है। जिले मे मंगलवार को कोरोना के चार नए केस मिले हैं। वहीं 16 संक्रमित मरीज स्वस्थ हुए है। पिछले दो दिनों से मौतों का सिलसिला भी थमा है। फिलहाल, जिले में 86 एक्टिव केस है। वहीं अभी तक 3,39,881 लाभार्थियों को टीका लग चुका है। अस्पतालों में बेड भी खाली हो चुके हैं।
सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने बताया कि जिले में कोविड-19 का रिकवरी रेट 98.02 प्रतिशत हो गया है। जिले की कुल आबादी का 28.30 प्रतिशत का कोरोना टेस्ट हो चुका है। अब तक जिले में कुल 24,536 संक्रमित मरीज मिल चुके है, जिनमें से 24,051 मरीजों ने कोरोना को मात दी है। जिले में मंगलवार को चार नए केस मिले हैं। जिनमें से 50 वर्षीय महिला कांसापुर, 72 वर्षीय पुरुष बिलासपुर, 24 वर्षीय महिला खुर्दबन, 54 वर्षीय पुरुष शुगर मिल कॉलोनी से हैं।
जिले में कोरोना के 86 एक्टिव केस है। जिनमें से 62 संक्रमित मरीज होम आइसोलेशन में है। जबकि 24 संक्रमित मरीज कोविड-19 अस्पतालों में भर्ती है। चार एक्टिव केस दूसरे जिले व राज्यों के अस्पतालों में भर्ती है। जबकि 20 मरीज जिले में भर्ती है। वहीं जिले में 3,40,193 लोगों की जांच कराई जा चुकी है। जिनमें से 3,12,201 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। मंगलवार शाम तक कोविड-19 टेस्टिंग टीम द्वारा 572 लोगों के सैंपल लिए गए। अभी 902 लोगों की रिपोर्ट लंबित है।
सिविल सर्जन के मुताबिक मंगलवार को 32 केंद्रों पर 5749 लोगों ने टीका लगवाया। अभी तक 3,39,881 लाभार्थियों का टीकाकरण हो चुका है। जिसमें 2,89,325 को प्रथम व 50,556 को दूसरी डोज लग चुकी है। जिसमें 1,54,900 पुरुषों व 1,34,368 महिलाएं टीका लगवा चुकी है।
लापरवाही पड़ेगी भारी : अरोड़ा
यमुुनानगर। जिला सचिवालय सभागार में मंगलवार को कोविड-19 को लेकर डीसी गिरीश अरोड़ा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। डीसी ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम हो रहा है, लेकिन इसे खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी। उन्होंने लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की। नियमों के प्रति लापरवाही भारी पड़ेगी।
डीसी गिरीश अरोड़ा ने कहा कि मास्क का प्रयोग करना और दो गज की दूरी का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि लोग जागरूक रहे तो तीसरी लहर नहीं आएगी। तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकारी व निजी अस्पतालों में सभी प्रबंध कर लिए गए हैं। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बच्चों के लिए बेडों की पूरी व्यवस्था है और अलग से वार्ड बनाए गए है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।