बरसात की मार से जहां शहरवासी झेल रहे है। वहीं दादूपुर नलवी नहर व राक्षी नदी में आए पानी से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल तबाह होने की कगार पर है। नहर व राक्षी नदी से सुढै़ल क्षेत्र में लगभग 160 एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है। जलमग्र हुई फसल का रविवार को कृषि विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा किया तो किसान उन पर भड़क पड़े। किसानों ने अधिकारियों ने प्रभावित हुई फसलों के मुआवजे की मांग की। किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें फसल का बीमा करवाने की बात कहीं। हालांकि बाद में अधिकारियों ने प्रभावित फसलों का दौरा कर इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही।
गांव सढुल व सुढै़ल की पूर्व की तरफ दादूपुर नलवी नहर पड़ती है, जबकि पश्चिम की तरफ राक्षी नदी पड़ती है। बरसात आने पर नहर व नदी दोनों में पानी आता है। दादूपुर नलवी नहर की सही निकासी न होने के कारण इसका पानी यहीं रुक जाता है जो ओवरफ्लो होकर खेतों में घुस जाता है। अब लोगों ने धान की फसल की रोपाई की हुई है। नहर में आए बरसाती पानी के चलते लगभग 160 एकड़ फसल जलमग्र हो चुकी है। फसलें पानी में डूब गई। प्रभावित किसान विनय, हरपाल, रामस्वरूप, नरेश, संजू, मोहन आदि ने बताया कि अब इस पानी को निकालने का कोई साधन भी नहीं है।
जलभराव को लेकर रविवार को कृषि विभाग से एडीओ विरेंद्र, पटवारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा किया। अधिकारियों के क्षेत्र में आते ही किसानों का रोष फूट पड़ा और उन्होंने अधिकारियों से पानी की निकासी के प्रबंध कराने की बात कहीं। प्रभावित फसल का मुआवजा मांगा। किसानों ने बताया कि जब उन्होंने प्रभावित हुई फसल के मुआवजे की मांग की तो अधिकारियों ने उन्हें फसल का बीमा करवाने की बात कही। जिससे किसानों में रोष है। हालांकि बाद में अधिकारियों ने प्रभावित फसल की रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया।
140 एकड़ धान, 20 एकड़ गन्ने तथा चारे की फसल प्रभावित :
भाकियू के प्रदेश सचिव व किसान हरपाल सुढल, संजू, रामस्वरूप, नरेश आदि ने बताया कि क्षेत्र में नहर व नदी के बीच करीब 160 एकड़ फसल में पानी खड़ा हुआ है। जिसमें लगभग 140 एकड़ में धान की फसल लगाई हुई है। जबकि 20 एकड़ जमीन में गन्ना व पशुओं के लिए चारा उगाया हुआ है।
अपनी उपलब्धियां गिनाते रहे अधिकारी :
किसानों ने बताया कि रविवार को कृषि व अन्य विभागों से कुछ अधिकारी जलमग्र हुई फसलों का मुआयना करने आए। लेकिन वह पानी की निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर गए। पानी की निकासी करना प्रशासन का काम है। अधिकारियों ने इसकी निकासी तो नहीं कराई उल्टा अपनी उपलब्धियां गिनवाने लग गए। जब मुआवजे की बात आई, तो उन्होंने फसलों का बीमा करवाने की बात कह दी, लेकिन अब वे अचानक बीमा कहां से करवाए।
वर्जन ::::::
सुढल-सुढैल क्षेत्र में रविवार को जलमग्र हुई फसलों का मुआयना करने के लिए एडीओ को मौके पर भेजा गया था। खेतों से जल्द ही पानी की निकासी करवा दी जाएगी। जहां तक फसलों के मुआव जें की बात है, इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जो उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
- डॉ. आदित्य प्रताप डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग।