डीसी मंदीप सिंह बराड़ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत
किसी भी विद्यार्थियों को शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकता। विद्यार्थियों को
स्कूलों में शारीरिक दंड न दिया जाए और वे एक स्वच्छंद, सम्मानजनक एवं
भयमुक्त वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सके।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल
में ऐसी पेटी की व्यवस्था करनी होगी जिसमें बालक अपनी शिकायतों को डाल
सकें, चाहे वे शिकायतें गुमनाम ही क्यों न हों। उपायुक्त मंदीप सिंह
बराड़ ने बताया कि राष्ट्रीय बालक अधिकार, संरक्षण आयोग भारत सरकार और
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, हरियाणा के निदेशालय द्वारा जारी
पत्रों के अनुसार सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थाओं में छात्र व
छात्राओं पर उनके अधिकारों के प्रति हिंसा तथा असंवेदनशीलता की संस्कृति की
अभिव्यक्तियां जारी हैं।
पत्रों में आदेश दिए गए है कि इस बारे ऐसा भविष्य
में न किया जाए और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग हरियाणा को
अपनी-अपनी शिक्षण संस्थाओं की रिपोर्ट तुरंत भिजवाई जाए कि संस्था में कोई
ऐसा अपराध किसी बालक पर नहीं हुआ है।
उपायुक्त ने बताया कि उक्त आदेशों की
दृढ़ता से पालना को सुनिश्चित करने के लिए पत्र की प्रतियां भेजकर शिक्षण
संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि छात्र एवं छात्राआें के हितों की रक्षा
के लिए सरकार द्वारा जारी हिदायतों की दृढ़ता से पालना की जाए। उन्होंने
कहा कि पत्र में जारी हिदायतें सभी स्कूलों में स्टाफ के सदस्यों को नोट
करवाई जाएं तथा शिक्षण संस्थाओं और विद्यालयों के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएं
ताकि बच्चों को इनकी जानकारी हो।