संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जियो-फेंसिंग हाजिरी के विरोध में आयुष विभाग के रेगुलर व अनुबंध डाॅक्टर, फार्मासिस्ट, एनएचएम कर्मचारी एवं सभी आयुष योग सहायकों ने अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर निर्जल व निराहार उपवास रखा। इस दौरान सभी ने अपनी ड्यूटी भी दी।
आयुष मेडिकल आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. ललित सैनी ने बताया कि आयुष चिकित्सक गांवों, स्कूलों, योग सत्रों व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। वहां नेटवर्क की समस्या और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण जियो-फेंसिंग उपस्थिति अव्यवहारिक है। वर्तमान में बायोमेट्रिक व मैनुअल सिस्टम पहले से लागू हैं।
जियो-फेंसिंग जोड़ना केवल बोझ बढ़ाता है। सेवा-गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं करता। तीसरा मोबाइल एप डाउनलोड कर कर्मचारियों के निजी मोबाइल से ट्रैकिंग करना उनकी गोपनीयता का हनन है और व्यक्तिगत डाटा के दुरुपयोग की आशंका बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि डाक्टरों का प्रथम कर्तव्य रोगियों की सेवा है।
मोबाइल-आधारित ट्रैकिंग पर जोर देने से उनका ध्यान बंटता है और मनोबल प्रभावित होता है। मौजूदा बायोमीट्रिक या मैनुअल सिस्टम को मजबूत किया जाए और साप्ताहिक या मासिक दौरा-कार्यक्रम को जिला आयुर्वेदिक अधिकारी या एसडीएम द्वारा सत्यापित करवाया जाए। यह व्यवस्था जवाबदेही के साथ-साथ सेवा-प्रदायगी को सुचारु रखेगी। डॉ. सैनी ने कहा कि जनसेवा को प्रभावित करने वाली अव्यवहारिक प्रणालियों का विरोध जारी रखा जाए। एसोसिएशन की मांग है कि सरकार जियो-फेंसिंग अटेंडेंस सिस्टम को तुरंत वापस लेकर एक व्यवहारिक, सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था लागू करें।