संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/रादौर। अनाज मंडियों में गेहूं बेचने में आ रही दिक्कतों, धीमे उठान और भुगतान में हो रही देरी पर किसानों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने जिलेभर में मार्केट कमेटी कार्यालयों पर तीन घंटे धरना दिया। रादौर में किसानों ने अनाज मंडी स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला जड़कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मंडियों में इस समय 219524 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, लेकिन इसमें से केवल 184901 मीट्रिक टन की ही खरीद की गई है। वहीं 86577 मीट्रिक टन गेहूं का उठान हुआ है, जो कुल खरीद का मात्र 47 प्रतिशत है। उठान की धीमी गति के कारण मंडियां गेहूं से अटने लगी हैं और किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो रही है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय रादौर का घेराव किया। इस दौरान भारतीय किसान सभा के नेता जरनैल सिंह, दीप राणा नंबरदार और महीपाल चमरौड़ी ने आरोप लगाया कि सरकार की नई खरीद नीतियों और पोर्टल आधारित प्रणाली ने मंडियों की व्यवस्था को जटिल बना दिया है, जिससे किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
किसान नेताओं ने कहा कि ठेकेदारों के पास मजदूरों की कमी है, जिसके चलते गेहूं की बोरियों से लदे ट्रक गोदामों और मंडियों में खड़े हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अधिक समय लगने से गेट पास बनने में देरी हो रही है। नतीजतन, खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। किसानों का आरोप है कि नमी का बहाना बनाकर खरीद को जानबूझ कर टाला जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार से मांग की कि नई नीतियों को रद्द कर पुरानी व्यवस्था के तहत फसल खरीद की जाए। साथ ही उन्होंने गेहूं पर 500 रुपये प्रति एकड़ बोनस देने, नमी के मानकों को मौसम के अनुसार संशोधित करने और मंडियों में पर्याप्त शेड व तिरपाल की व्यवस्था करने की मांग उठाई।
किसानों ने कहा कि बेमौसम की बारिश के कारण गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस राहत नहीं दी जा रही। किसान नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये फैसले कृषि क्षेत्र को धीरे-धीरे निजीकरण और कॉरपोरेट के हाथों में सौंपने की दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने टैरिफ बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और सीड बिल जैसे प्रावधानों को भी किसान विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की भी मांग की। इसके साथ ही किसानों ने ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की भी मांग रखी।