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Yamuna Nagar News: किसानों का जमीन लेने से इंकार, बोले-नहर वाटर लेवल के लिए लाइफ लाइन

Thu, 15 Aug 2024 05:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। दादूपुर नलवी नहर पर ताजा फैसले का किसान विरोध जता रहे हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे जमीन वापस लेने की स्थिति में नहीं हैं। उपजाऊ जमीन बंजर हो चुकी है और यहां 10 से 30 फीट गहरे गड्ढे बने हुए हैं। किसानों के पास मुआवजे की धनराशि भी नहीं बची, जो सरकार को वापस की जा सके। सरकार सभी किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देकर जमीन अपने पास रखे, चाहे यहां नहर बनाए या किसी अन्य काम के लिए प्रयोग करे। ऊबड़-खाबड़ जमीन पर न खेती तो हो ही नहीं सकती, क्योंकि इस जमीन की उपजाऊ क्षमता खत्म हो चुकी है।
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2009 में छोड़ा गया था पानी
जानकारी के अनुसार 2009 में जब दादूपुर-नलवी नहर के प्रोजेक्ट को पूरा कर पानी छोड़ा गया तो क्षेत्र में 30 फीट तक जल स्तर में वृद्धि हुई। यानी यह एक सफल प्रोजेक्ट था, लेकिन सरकार ने 2000 किसानों को 926 एकड़ का मुआवजा नहीं दिया जिसके लिए किसान दर दर भटकते रहे। इसके बाद 5 मई 2016 को कोर्ट ने आदेश दिया कि 2887 रुपये प्रति वर्ग मीटर यानी सवा करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा किसानों को दिया जाए। दुर्भाग्य की बात ये है कि पूरा प्रोजेक्ट सफल होने के बाद भी किसान अपनी जमीन के मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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कब क्या हुआ
-यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए दादूपुर नलवी योजना 1985 में शुरू की गई थी।

-1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी।

-साल 2004 और उसके बाद 860 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई।

-22 अगस्त 2017 को किसानों ने लघु सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जो अभी भी जारी है।

-27 सितंबर 2017 को कैबिनेट की मीटिंग में दादूपुर नलवी नहर की जमीन को डि-नोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी करने का अप्रूवल दिया गया।

-कैबिनेट की मीटिंग के बाद जो नोटिफिकेशन 25 दिसंबर 2017 को होनी थी। वह दस महीने यानि 311 दिन बाद तीन अगस्त 2018 को हुई।

-राज्यपाल ने राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 की सेक्शन 101-ए की पावर का इस्तेमाल करते हुए गजट डी-नोटिफिकेशन किया।
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नहीं लेंगे जमीन वापसइस नहर में मेरी एक एकड़ जमीन आई हुई है, हुड्डा सरकार में पांच लाख मुआवजा मिला था। उसके बाद कोई पैसा नहीं मिला। दूसरा सरकार इस तरह की बात कर किसानों के साथ भद्दा मजाक कर रही है। यह केवल चुनावी स्टंट है। हम किसी भी सूरत में एक्वायर की गई जमीन को वापस नहीं लेंगे।
-सुभाष कांबोज, भगवान पुर।
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सरकार को मुआवजा देना चाहिए
मेरी खुद तीन एकड़ भूमि दादुपुर नलवी नहर के अंडर आई हुई है। सरकार को इस नहर को चलाना चाहिए, इससे क्षेत्र में सिंचाई का लेवल बढ़ा है। इसके अलावा 15 गांवों के किसानों का भी फैसला है वे किसी भी सूरत में यह जमीन वापस नहीं लेना चाहिए। सरकार को सुप्रीम व हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
-अर्जुन सुढैल, सदस्य, दादूपुर-नलवी नहर संघर्ष समिति।
अब जमीन किसी काम की नहीं रही
मेरा इस जमीन में आधे एकड़ भूमि गई हुई है। जो अब किसी काम नहीं रही। सरकार बिना मतलब के परेशान करने का काम कर रही है। अब इस जमीन को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। जबकि यह नहर सिंचाई के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

-अशोक कुमार, भगवानपुर।
नहर को बंद करने की बजाय इसे चलाए
दादूपुर नलवी नहर को सरकार ने बंद करने की बजाय इसे चलाना चाहिए। यह नहर वाटर लेवल के लिए लाइफ लाइन है। यह नहर पहले से ही खुदी हुई इसलिए सिंचाई का स्त्रोत को देखते हुए आगे तक बढ़ाना चाहिए। इससे किसानों को सिंचाई करने में काफी राहत मिलेगी।
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-संजू गुंदियाना, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन यमुनानगर।
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