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Yamuna Nagar News: दादूपुर-नलवी नहर को किसानों ने मिट्टी से किया बंद, मुआवजा लौटाया

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यमुनानगर। हरियाणा सरकार के दादूपुर-नलवी नहर को डी- नोटिफिकेशन के आदेशों के बाद किसानों ने इस नहर को बंद करना शुरू कर दिया है। ससौली गांव के किसानों ने सुढैल व खेड़ा गांव के पास नहर में मिट्टी डाल कर इसे बंद कर दिया। जेसीबी की मदद से नहर में मिट्टी भरी जा रही है। वहीं कुछ और अन्य किसान भी हैं जो नहर को पाटने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए मिट्टी का प्रबंध किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस नहर को डि-नोटिफाई करने का पूरे प्रदेश में विरोध हुआ था। किसानों ने कई माह तक लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी जगाधरी के गेट पर धरना भी दिया था।
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ससौली गांव के किसान मनीष कुमार ने बताया कि उनकी करीब सात एकड़ जमीन का दादूपुर-नलवी नहर के लिए तत्कालीन सरकार ने अधिग्रहण किया था। यह जमीन सुढैल व खेड़ा गांव के रकबा में है। वर्तमान सरकार ने दादूपुर-नलवी नहर को डी-नोटिफाई कर दिया था। सरकार ने किसानों से कहा था कि वह किसानों को कोर्ट के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देगी। इसलिए किसान मिला हुआ मुआवजा वापस करके नहर की जमीन को वापस ले सकते हैं। इसके लिए सरकार ने 31 दिसंबर 2024 तक मुआवजा वापस करने के आदेश दिए थे। उन्हें सरकार की तरफ से करीब 95 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर दिया गया था। यह राशि उन्होंने सरकार के खाते में जमा करवा दी थी। सरकार ने राशि लेने के बाद जमीन का इंतकाल परिवार के सदस्यों के नाम कर दिया। नहर के लिए दी गई जमीन उनके परिवार के सुमेर सिंह, अजमेर सिंह, गजे सिंह, प्रीतम सिंह, बालकिशन के नाम थी। चार-पांच दिनाें से कई जेसीबी लगाकर आसपास के अपने खेतों से मिट्टी उठाकर नहर में डाली जा रही है। मनीष कुमार का कहना है कि सरकार अब बढ़ा हुआ मुआवजा देने वाली तो थी नहीं, इसलिए उन्होंने जमीन को वापस लेना ही बेहतर समझा। कम से कम इसमें खेती तो कर सकेंगे।

सभी किसान मुआवजा लौटाने में सक्षम नहीं: हरपाल सिंह
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सिंह का कहना है कि हरियाणा सरकार के दादूपुर-नलवी नहर को डी- नोटिफिकेशन के लिए बनाए गए कानून 101ए को असंवैधानिक करार देते हुए हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय ने दिसंबर माह में निरस्त कर दिया था। इन आदेशों से किसानों में खुशी का माहौल था। किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिलने और नहर के फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी थी। सभी किसान मुआवजा वापस करने की स्थिति में नहीं है। वहीं नहर को मिट्टी से पाटने में भी लाखों रुपये खर्च आएगा। किसानों को अभी इंतजार करना चाहिए। अचानक से नहर को बंद करना गलत है। क्योंकि मानसून के दौरान नहर में पानी आने से दिक्कत बढ़ेगी।
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