संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बाद किसानों ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नुकसान की जानकारी देनी शुरू कर दी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पोर्टल पर दी गई जानकारी को ही नुकसान का आधार माना जाएगा या फिर पटवारी या अन्य कर्मचारी मौके पर जाकर जांच करेंगे। इसे लेकर किसान मझधार में फंसे हुए हैं।
किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि सरसों की जो फसल खेतों में कटी हुई है उसे ऐसे ही पड़ा रहने दें या फिर मंडी में जाकर बेच दें। 78 गांवों में सरसों की फसल ऐसे ही खेतों में पड़ी हुई है। सरसों की फसल काफी समय पहले ही पक गई थी। इसलिए किसानों ने इसकी कटाई कर रखी थी और इसे मशीन से निकालने की तैयारी हो रही थी।
जिले में 28 फरवरी की शाम को हुई ओलावृष्टि ने खेतों में कटी कटाई सरसों की फसल को बर्बाद कर दिया। ओलों की मार से सरसों के दाने तक निकल कर खेतों में बिखर गए। ऐसे में किसान चाहते हैं कि सरसों की जो बची हुई फसल है उसे जल्द से जल्द मंडी या फिर दुकानदारों को बेच कर कुछ पैसे हाथ में आ जाए।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना, निदेशक मंदीप सिंह का कहना है कि खराब मौसम किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है। तीन दिन बाद फिर से बादल छाने की उम्मीद है। यदि अब बारिश हुई तो खेतों में जो बची हुई सरसों है वह भी हाथ में नहीं आएगी। जो फसल ओलावृष्टि से खराब हुई थी उसकी गिरदावरी नहीं हुई है।
कितना नुकसान हुआ है या देखने के लिए कोई खेत में जाएगा या नहीं यह भी बताया नहीं जा रहा। इस बात का डर सता रहा है कि वह सरसों को बेच दें और बाद में पटवारी गिरदावरी करने के लिए खेतों में पहुंच जाए। यदि पटवारी को खेत में फसल नहीं मिली तो उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाएगा। मौके पर किए गए आकलन के आधार पर ही तय होता है कि कितनी फसल खराब है और किसान को कितना मुआवजा दिया जाए।
सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं
सरकार ने अभी तक सरसों की सरकारी खरीद को शुरू नहीं किया है। इसलिए आढ़ती व दुकानदार इसका फायदा उठाते हुए मनचाहे कम रेट पर किसानों से सरसों की खरीद कर रहे हैं। इस बार सरकार ने काली सरसों का सरकारी रेट 5950 रुपये निर्धारित किया है। परंतु अभी खरीद शुरू न होने से सरसों की बिक्री 5500 से 5600 रुपये प्रति क्विंटल हो रही है। इसी तरह पीली सरसों 7000 से 8000 रुपये क्विंटल की दर से बिक रही है।