भूमि अधिग्रहण के खिलाफ और कैथल में किसानों द्वारा दिए जा रहे धरने के समर्थन में किसानों ने सोमवार को लघु सचिवालय में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
यमुनानगर व कैथल में नेशनल हाईवे के लिए अधिगृहीत की गई जमीन के कम रेट मिलने पर रोष जताया और अधिगृहीत की गई जमीन के कम रेट को बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शन से पहले किसानों ने जगाधरी अनाज मंडी में बैठक कर 15 अगस्त को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया।
भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान सोमवार को जगाधरी अनाज मंडी में एकत्रित हुए। यहां भाकियू के प्रदेश संयोजक बाबू राम गुंदयाना की अध्यक्षता में बैठक की। बैठक के बाद सभी किसान अनाज मंडी से प्रदर्शन करते हुए नेशनल हाईवे 73 से रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे।
बाबू राम गुंदयाना व जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने कहा कि कई दिन से कैथल के किसान तितरम मोड़ पर सरकार द्वारा अधिगृहीत की गई भूमि के रेट को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जो भूमि का अधिग्रहण नए कानून के तहत किया गया है, उसमें भूमि की मूल कीमत 12 लाख रुपये प्रति एकड़ रखी गई है, जो बहुत कम है। शहर से दूरदराज की भूमि की कीमत 30 लाख रुपये मानी गई हैं।
उन्होंने कहा कि शहर के नजदीक की कीमत किसी तरह से कम नहीं हो सकती, जो इलाके की मार्केट रेट से कम है, जिससे इलाके के किसानों के साथ अन्याय हो रहा हैं।
कलायत कस्बे में भी भूमि का रेट 30 लाख माना गया है, वे भी नए कानून के तहत आए हैं और उनका आवार्ड भी एक जनवरी के बाद सुनाया गया है। इसलिए भूमि का रेट 30 लाख माना जाना चाहिए। किसानों ने कहा कि कैथल के किसानों की अधिगृहीत की गई भूमि के रेट की मांग जायज हैं।
यदि आंदोलन कर रहे किसानों को अधिगृहीत की गई भूमि के जायज रेट नहीं मिले, तो जिले के किसान भी कैथल के किसानों के आंदोलन करेंगे। प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सुढल, जिला सचिव कश्मीरी लाल, कृष्ण पाल, संदीप महेश्वरी, गुरमुख सिंह, राज कुमार, सतपाल, सुखदेव, संदीप टोपरा, अनिल मंडेबर, सिटू, केसर सिंह, यशपाल आदि किसानों ने नारेबाजी की।
मार्केट रेट से चार गुना मिले मुआवजा
किसानों ने कहा कि सरकार पंचकूला में एक एकड़ के अधिग्रहण पर एक करोड़ रुपये दे रही है, जबकि यमुनानगर के किसानों को केवल 25 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। पंचकूला के मुकाबले यमुनानगर जिले की जमीन पर एक साल में तीन-तीन फसलें होती हैं। ऐसे में यहां की जमीन का दाम उससे कहीं अधिक बनता है। उन्होंने जमीन का मुआवजा मार्केट रेट से चार गुना देने की मांग की।
मनाएंगे काला दिवस
किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन और विस्तृत रूप में होगा। 15 अगस्त के दिन जब एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाएंगे वहीं किसान उस दिन को काला दिवस के रूप में मनाएंगे और उसके बाद आगामी आंदोलन की रणनीति भी तैयार की जाएगी।